Wednesday, 07 Oct 2026

दोहरे मापदंडों का शिकार है ग्लोबल साउथ: मोदी

रियो डी जेनिरियो (07 जुलाई 25)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि ‘ग्लोबल साउथ' अक्सर ‘‘दोहरे मानदंडों'' का शिकार हुआ है और विश्व अर्थव्यवस्था में प्रमुख योगदान देने वाले राष्ट्रों को निर्णय लेने वाले मंच पर जगह नहीं मिल पाती है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) सहित प्रमुख वैश्विक संस्थाओं में तत्काल सुधार पर भी जोर दिया।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में मोदी ने कहा कि 20वीं सदी में गठित वैश्विक संस्थाओं में विश्व की आबादी के दो-तिहाई हिस्से को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ' के बिना ये संस्थाएं ऐसे मोबाइल फोन की तरह लगती हैं, जिनके अंदर ‘सिम कार्ड' तो लगा हुआ है लेकिन नेटवर्क नहीं है। वार्षिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत समूह के सदस्य देशों के नेताओं द्वारा एक सामूहिक तस्वीर खिंचवाने के साथ हुई, जिसके बाद ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा ने अपना संबोधन दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘ग्लोबल साउथ अक्सर दोहरे मानदंडों का शिकार हुआ है। चाहे वह विकास का मुद्दा हो, संसाधनों के वितरण या सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का मामला हो।' पहले पूर्ण सत्र में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने इस बात पर अफसोस जताया कि जलवायु वित्त, सतत विकास और प्रौद्योगिकी तक पहुंच जैसे मुद्दों पर ‘ग्लोबल साउथ' को अक्सर आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला है। उन्होंने कहा, ‘आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में जिन देशों का बड़ा योगदान है, उन्हें निर्णय लेने वाले मंच पर जगह नहीं दी गई है।'' उन्होंने कहा, ‘‘यह केवल प्रतिनिधित्व का सवाल नहीं है, बल्कि विश्वसनीयता और प्रभावशीलता का भी सवाल है।' मोदी ने कहा कि आज दुनिया को एक नयी बहुध्रुवीय और समावेशी व्यवस्था की जरूरत है और इसकी शुरुआत वैश्विक संस्थाओं में व्यापक सुधारों से होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘सुधार केवल प्रतीकात्मक नहीं होने चाहिए, बल्कि उनका वास्तविक प्रभाव भी दिखना चाहिए। शासन व्यवस्था, मताधिकार और नेतृत्व के पदों में बदलाव होना चाहिए।' प्रधानमंत्री ने तर्क दिया कि नीति-निर्माण में ‘ग्लोबल साउथ' के देशों की चुनौतियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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