मंदसौर(13 अक्टूबर 24)। जिले के धमनार गांव में दशहरे का पर्व अनूठे और पारंपरिक अंदाज में मनाया जाता है। यहां रावण वध तलवार या अग्नि से नहीं, बल्कि एक मुक्के से होता है, और यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है।
विशेष आयोजन और परंपरा- धमनार में रावण की घुटनों पर हाथ टिकाए हुए 51 फीट ऊंची सीमेंटेड प्रतिमा स्थापित है। इस प्रतिमा के चारों ओर राम और रावण की सेनाओं के बीच एक प्रतीकात्मक युद्ध होता है, जिसमें लकड़ी के जलते हुए टोकरे फेंककर दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आक्रमण करते हैं। रावण की सेना प्रतिमा के पास खड़ी रहती है और राम की सेना पर आक्रमण करती है, जबकि राम की सेना रावण तक पहुंचने की कोशिश करती है।
रावण वध की परंपरा- इस परंपरा की खास बात यह है कि रावण का वध तलवार या अग्निशस्त्र से नहीं, बल्कि राम की सेना का कोई भी युवक रावण की प्रतिमा पर चढ़ता है और उसकी नाक पर मुक्का मारता है। यह मुक्का रावण के वध का प्रतीक होता है। जिस युवक को यह कार्य करने का मौका मिलता है, उसे उस साल का 'राम' कहा जाता है।
घनश्याम, 'राम' कहलाया- इस साल भी धमनार में यह परंपरा निभाई गई और घनश्याम धाकड़ नामक युवक ने रावण की प्रतिमा पर चढ़कर उसकी नाक पर मुक्का मारकर वध किया, जिससे वह इस साल का 'राम' कहलाया।
लोक संस्कृति का प्रतीक- धमनार की दशहरा परंपरा न केवल आस्था और लोक संस्कृति का अद्वितीय उदाहरण है, बल्कि इसे देखकर रामायण की कथा का जीवंत रूप भी दिखाई देता है। यह दशहरा भारत की परंपराओं और लोक जीवन की गहराई को दर्शाता है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है।