मुंबई (28 अप्रैल 25)। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने रविवार को कहा कि कैंसर से लड़ना नीति निर्माताओं के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता वाला क्षेत्र है और पिछले आठ वर्षों में उच्च गुणवत्ता वाले इलाज के लिए 3000 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। वह यहां राज्य कैंसर संस्थान में ‘ट्रूबीम' सुविधा (रेडिएशन ऑन्कोलॉजी में इस्तेमाल होने वाला लीनियर एक्सेलरेटर) का उद्घाटन करने के बाद संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘हमने कैंसर के उपचार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। हमने जांच और पहचान के लिए अपने मानक को बढ़ा दिया है। 1,75,000 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में मुंह, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की जांच की गई है। हमने जांच के लिए 30 वर्ष की आयु अनिवार्य कर दी है। नीति निर्माताओं के लिए कैंसर का उपचार एक प्राथमिकता वाला क्षेत्र है।'' नड्डा ने कहा कि मुंह के कैंसर को लेकर 26.70 करोड़ से अधिक लोगों की जांच की गई है, जिसके बाद 1.63 लाख मामले सामने आए।
उन्होंने कहा, ‘स्तन कैंसर के लिये 14.6 करोड़ लोगों की जांच की गई, जिसके परिणामस्वरूप 57,179 मामलों का पता चला। गर्भाशय ग्रीवा कैंसर को लेकर नौ करोड़ से अधिक लोगों की जांच की गई और 96,973 लोगों के इससे ग्रस्त होने का पता चला।' केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, ‘ट्रूबीम सुविधा यहां उच्च स्तरीय उपचार उपलब्ध कराने में मदद करेगी। हमारी सरकार कैंसर से आक्रामक तरीके से लड़ रही है। कैंसर शब्द लोगों को डराता है, उन्हें भावनात्मक और आर्थिक रूप से तोड़ देता है। हम कम से कम समय पर हस्तक्षेप कर सकते हैं और सक्रिय रणनीति बनाकर मरीजों के जीवन को बेहतर बना सकते हैं।' केंद्र सरकार द्वारा उठाये गये कदमों का जिक्र करते हुए नड्डा ने कहा कि 20 राज्य कैंसर संस्थान और इतने ही तृतीयक कैंसर देखभाल संस्थान स्थापित किए गए हैं, जिनमें महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के छत्रपति संभाजीनगर और लातूर के भी संस्थान हैं। उन्होंने कहा कि हर साल 14.50 लाख लोगों में कैंसर पाया जाता है।
इस मौके पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यहां शुरू की गई ‘ट्रूबीम' सुविधा राज्य में पहली ऐसी सुविधा है। उन्होंने कहा, ‘पहले मराठवाड़ा के लोगों को कैंसर के इलाज के लिए मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल जाना पड़ता था। ट्रूबीम मशीन सुनिश्चित करेगी कि उन्हें यहीं पर उच्च गुणवत्ता वाला उपचार मिल सके। यहां पीईटी (पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी) स्कैन को भी मंजूरी दी गई है।' उन्होंने कहा, ‘कैंसर खान-पान और जीवनशैली की आदतों के कारण फैल रहा है। हम कैंसर से लड़ने के लिए दो तरीके अपना रहे हैं। हम मरीजों का इलाज कर रहे हैं और बड़ी संख्या में लोगों की जांच कर रहे हैं।'