Tuesday, 29 Sep 2026

नवाचार, शोध और अनुसंधान के केंद्र बनेंगे विश्वविद्यालय

भोपाल (26 जुलाई 24)। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय परिसर स्थित ज्ञान विज्ञान भवन में 'भारतीय ज्ञान परंपरा और शोध अनुसंधान' विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध कार्यशाला में कहा कि भारत का ज्ञान विश्व मंच पर सबसे पुरातन और सर्वश्रेष्ठ ज्ञान है। यह ज्ञान परम्परा एवं मान्यता के रूप में भारतीय समाज में सर्वत्र विद्यमान है। शोध एवं अनुसंधान के आधार पर भारतीय ज्ञान परम्परा एवं मान्यता स्थापित हुई हैं। हर विधा-हर क्षेत्र में भारतीय ज्ञान परम्परा के युगानुकुल एवं वर्तमान वैश्विक आवश्यकतानुरूप, पुनः शोध एवं अनुसंधान कर दस्तावेजीकरण करने की आवश्यकता है। परमार ने 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परम्परा समावेशी शिक्षा' के आलोक पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020भारत को स्वत्व के भाव के साथ विश्वमंच पर सिरमौर बनने के लिए प्रेरित करती है। मंत्री परमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा से समृद्ध शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय नवाचार, शोध एवं अनुसंधान के केंद्र बनेंगे। परमार ने कहा कि भारत संपन्न और समृद्ध देश रहा है, इसलिए ऐतिहासिक कालखंडों में अंग्रेजों समेत सभी विदेशी आक्रांता भारत को लूटने आए थे। अंग्रेजों के आंकड़ों के अनुसार भारत 90प्रतिशत साक्षरता वाला देश था, यहां 7लाख से ज्यादा समाज द्वारा संचालित गुरुकुल थे। अंग्रेजों ने भारत की संस्कृति और शिक्षा को मिटाने का कुत्सित प्रयास किया, लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020के लागू होने से शिक्षा में भारतीय दर्शन और चिंतन पुनः जीवंत हो रहा है। 

हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक अशोक कड़ेल ने कहा कि बौद्धिक के साथ साथ श्रेष्ठ व्यक्तित्व निर्माण, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020का उद्देश्य है। इसके लिए शिक्षा नीति का विशेष ध्यान शोध एवं अनुसंधान में है। विद्यार्थियों में तार्किकता का विकास, चिंतन की दृष्टि और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए भारतीय ज्ञान परम्परा पर शोध एवं अनुसंधान किया जा रहा है। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. एस के जैन ने कहा कि शोध एवं अनुसंधान के लिए, शोधार्थियों के लिए विश्वविद्यालय के द्वार सदैव खुले हुए हैं। कार्यशाला की अवधारणा संयोजिका प्रो. रुचि घोष ने प्रस्तुत की और कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. पवन मिश्र ने किया। कुलसचिव डॉ. आई. के. मंसूरी ने आभार व्यक्त किया। विविध विशेषज्ञ, शिक्षाविद, शोधार्थी, प्राध्यापक, विद्यार्थी एवं विश्वविद्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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