उज्जैन ((28 जून 26)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हर 12 साल में होने वाला सिंहस्थ भारत का ही नहीं, विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। यह हमारी अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति, दर्शन, पीढ़ियों से चली आ रही विरासत, अटूट आस्था और हमारी आध्यात्मिक परम्पराओं का महासंगम है। इस धार्मिक उत्सव में मां शिप्रा के जल में स्नान करने से पापों का शमन होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम सिंहस्थ : 2028 को नव्य प्रारूप में भव्य, दिव्य और आध्यात्मिक बनाने की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इसके लिए हमारी सभी तरह के प्रबंधन एवं तैयारियां तेजी से जारी हैं। हम सब मिलकर पूरी निष्ठा, लगन और समर्पण से काम करेंगे, तभी सिंहस्थ : सिंहस्थ-2028 एक नई मिसाल कायम करेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को उज्जैन में 'सिंहस्थ-2016 के अनुभव, 2028 का संकल्प' विषय पर हुई एक वृहद प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का विधिवत् शुभारंभ किया। कार्यशाला में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ : 2028 के महाआयोजन से जुड़े सभी प्रशासनिक, पुलिस, स्वास्थ्य, नगर निगम और अन्य निर्माण एजेंसियों के अधिकारियों एवं अन्य प्रतिनिधियों से कहा कि सिंहस्थ केवल एक मेला नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र बिन्दु है। यह हमारी परम्पराओं, विरासत का भव्य प्रतीक है। इसकी गरिमा बनाए रखने हम सभी की जिम्मेदारी है। अधिकारी-कर्मचारी-स्वयंसेवी संगठन-जनप्रतिनिधि सभी लोग एक टीम की तरह सेवा भावना से कार्य करें, क्योंकि टीम वर्क ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने कहा कि 'स्वच्छ सिंहस्थ-स्वस्थ सिंहस्थ' ही हमारा संकल्प है। सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन सेवाओं और त्वरित राहत व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उज्जैन और इसके आस-पास के सभी जिलों में वर्तमान में 25 हजार करोड़ रूपए से अधिक की लागत के विभिन्न श्रेणी के कई विकास कार्य चल रहे हैं।