Saturday, 03 Oct 2026

नहीं रहीं आशा भोसले, कल होगा अंतिम संस्कार

मुंबई (12 अप्रैल 26)। भारतीय सिनेमा की दिग्गज पार्श्वगायिका आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया। उनका नाम संगीत जगत में एक ऐसी आवाज के रूप में लिया जाता है, जिसने करीब आठ दशकों तक श्रोताओं के दिलों पर राज किया। उनकी मधुर और बहुमुखी गायिकी ने उन्हें हर पीढ़ी का पसंदीदा बना दिया। भारतीय सिनेमा के इतिहास भोसले ने आठ दशकों के अपने करियर में 20 भाषाओं में 12,000 से अधिक गीत गाए। उन्हें वर्ष 2000 में दादासाहेब फाल्के और 2008 में पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनका अंतिम संस्कार सोमवार को शिवाजी पार्क में किया जाएगा।

8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में जन्मी आशा भोसले के पिता दीनानाथ मंगेशकर मराठी रंगमंच के प्रतिष्ठित कलाकार थे। कम उम्र में ही पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ उन्होंने फिल्मों में गाना और अभिनय शुरू किया।1948 में फिल्म चुनरिया से गायिकी की शुरुआत करने वाली आशा भोसले को असली पहचान 1957 में आई फिल्म नया दौर से मिली। संगीतकार ओ.पी. नैय्यर के साथ उनकी जोड़ी ने कई हिट गीत दिए। इसके बाद आर.डी. बर्मन के संगीत में फिल्म तीसरी मंजिल का गीत “आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा” ने उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया। 60 और 70 के दशक में आशा भोसले को अभिनेत्री हेलन की आवाज माना जाता था। “पिया तू अब तो आजा” और “ये मेरा दिल” जैसे गीत आज भी लोकप्रिय हैं। उन्होंने कैबरे, पॉप, गजल और शास्त्रीय हर शैली में अपनी अलग पहचान बनाई।

1981 में आई फिल्म उमराव जान ने उनकी गायिकी को नया आयाम दिया। 'दिल चीज क्या है' और 'इन आंखों की मस्ती' जैसी गजलों ने साबित किया कि वह हर तरह के गीतों में पारंगत हैं। इस फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। 1994 में पति आर.डी. बर्मन के निधन के बाद उन्होंने कुछ समय के लिए दूरी बना ली, लेकिन संगीतकार ए.आर. रहमान के साथ फिल्म रंगीला के गीत 'तन्हा तन्हा' से उन्होंने जोरदार वापसी की। आशा भोसले को आठ बार फिल्मफेयर पुरस्कार और 2001 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने हिंदी के अलावा कई भारतीय और विदेशी भाषाओं में गीत गाकर वैश्विक पहचान बनाई। आज भी उनके गाए गीत रिमिक्स और नई पीढ़ी के बीच उतने ही लोकप्रिय हैं। आशा भोसले की आवाज न केवल संगीत की दुनिया की धरोहर है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी है।

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