काठमांडू (06 जुलाई 26)। नेपाल सरकार देश का पहला टाइगर सैंक्चुअरी बनाने की तैयारी कर रही है। यह सैंक्चुअरी चितवन नेशनल पार्क के देवनगर क्षेत्र में बनाई जाएगी। इसका उद्देश्य उन बाघों को सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण देना है, जो घायल हैं, बूढ़े हो चुके हैं या मानव बस्तियों के लिए खतरा बन गए हैं। साथ ही इस परियोजना के जरिए इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया जाएगा। नेपाल के राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव संरक्षण विभाग के वरिष्ठ पारिस्थितिकीविद् हरि भद्र आचार्य के अनुसार, यह सैंक्चुअरी करीब 52 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगी और इसमें 18 से 20 बाघों को रखा जा सकेगा। फिलहाल ऐसे बाघों को छोटे-छोटे पिंजरों में रखा जाता है, लेकिन नई सैंक्चुअरी में उन्हें अधिक प्राकृतिक और खुला वातावरण मिलेगा।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, 'समस्याग्रस्त बाघ' वे होते हैं जो किसी कारण से इंसानों के लिए खतरा बन जाते हैं। इनमें ऐसे बाघ शामिल हैं जो क्षेत्रीय संघर्ष में घायल हो चुके हों।बूढ़े होने के कारण प्राकृतिक शिकार नहीं कर पाते। नए इलाके की तलाश में जंगल छोड़कर गांवों तक पहुंच जाते हैं और पशुओं या लोगों पर हमला करने लगते हैं। ऐसे बाघों को वापस जंगल में छोड़ना सुरक्षित नहीं माना जाता, इसलिए उन्हें इस विशेष सैंक्चुअरी में रखा जाएगा। नेपाल ने पिछले एक दशक में बाघ संरक्षण में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। वर्ष 2009 में जहां देश में केवल 121 बाघ थे, वहीं 2022 की गणना में उनकी संख्या बढ़कर 355 हो गई। लेकिन बाघों की बढ़ती संख्या के साथ मानव-बाघ संघर्ष और बचाए गए बाघों के पुनर्वास की चुनौती भी बढ़ी है।
सैंक्चुअरी को तीन हिस्सों में विकसित किया जाएगा। एक होल्डिंग सेंटर, जहां दो बाघ रखे जाएंगे। एक ऊंचे व्यूइंग प्लेटफॉर्म वाला क्षेत्र, जहां चार बाघों को देखा जा सकेगा। एक जीप सफारी जोन, जहां 10 से 12 बाघ खुले बाड़े में रहेंगे। यहां सबसे खास बात यह होगी कि बाघ खुले क्षेत्र में घूमेंगे, जबकि पर्यटक विशेष रूप से डिजाइन किए गए बंद और सुरक्षित सफारी वाहनों में बैठकर उन्हें देखेंगे। इसके अलावा कैनोपी ब्रिज और वॉच टावर से भी बाघों को देखने की सुविधा होगी।परियोजना में तीन-स्तरीय सुरक्षा बाड़ लगाई जाएगी ताकि न तो बाघ बाहर निकल सकें और न ही पर्यटक किसी खतरे में पड़ें। सफारी मार्ग और बाघों के क्षेत्र को अलग रखने के लिए विशेष फायर लाइन और सुरक्षा व्यवस्था भी बनाई जाएगी। नेपाल सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस परियोजना के लिए 3 करोड़ नेपाली रुपये आवंटित किए हैं। यह सैंक्चुअरी मौजूदा वन्यजीव बचाव केंद्र का विस्तार करके बनाई जाएगी, जहां पहले से पशु चिकित्सालय और बचाए गए जानवरों के लिए सुविधाएं मौजूद हैं।