Monday, 28 Sep 2026

परमाणु ऊर्जा: प्राइवेट-विदेशी कंपनियों की एंट्री

नईदिल्ली (17 अगस्त 26)। भारत ने शुक्रवार को प्राइवेट न्यूक्लियर पावर जेनरेशन के लिए एक सख्त निगरानी वाली अप्रूवल व्यवस्था का प्रस्ताव रखा, जिससे साबित ट्रैक रिकॉर्ड वाली विदेशी रिएक्टर टेक्नोलॉजी के लिए दरवाज़े खुल गए। ड्राफ्ट नियमों और रेगुलेशन ने अब तक की सबसे साफ तस्वीर पेश की है कि नई दिल्ली ग्लोबल न्यूक्लियर मार्केट के हिसाब से एंट्री और ऑपरेशन पर कंट्रोल बनाए रखते हुए, प्राइवेट और विदेशी इन्वेस्टर्स के लिए एक सख्त सुरक्षा वाला सेक्टर कैसे खोलना चाहता है।

न्यूक्लियर एनर्जी एक्ट के तहत ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, कंपनियां फॉर्मल लाइसेंस लेने से पहले वेंडर्स को जोड़ने, शुरुआती डेवलपमेंट का काम करने और जमीन सुरक्षित करने के लिए सैद्धांतिक रूप से अप्रूवल लेंगी। लाइसेंस मिलने के बाद, प्रोजेक्ट्स को डिजाइन, साइटिंग, कंस्ट्रक्शन, कमीशनिंग और ऑपरेशन को कवर करते हुए स्टेज-बाय-स्टेज रेगुलेटरी जांच का सामना करना पड़ेगा। ड्राफ्ट रेगुलेशन रेगुलेटर्स के लिए ओवरसाइट पावर का प्रस्ताव करते हैं, जिसमें प्रोजेक्ट के खास स्टेज पर काम रोकने की क्षमता भी शामिल है। भारत की न्यूक्लियर इंडस्ट्री ज्यादातर सरकारी कंट्रोल में रही है, और 1974 में हुए न्यूक्लियर टेस्ट धमाके के बाद इंटरनेशनल पाबंदियों के बाद से दशकों तक विदेशी फ्यूल और टेक्नोलॉजी तक पहुंच सीमित रही है। पिछले साल, देश ने न्यूक्लियर एनर्जी एक्ट में बदलाव किया ताकि प्राइवेट कंपनियों को प्रोजेक्ट बनाने और चलाने की इजाजत मिल सके, साथ ही लाइसेंसिंग और स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर मटीरियल पर उनका कंट्रोल बना रहे। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ग्रीनहाउस-गैस एमिटर अगले 2 दशकों में न्यूक्लियर जेनरेशन कैपेसिटी को 12 गुना बढ़ाकर 100 गीगावाट करना चाहता है, जिससे इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और विदेशी टेक्नोलॉजी बहुत जरूरी हो गई है।

रॉयटर्स ने पहले बताया था कि भारत ने न्यूक्लियर पावर में इन्वेस्ट करने के लिए अडानी ग्रीन, टाटा पावर, और रिलायंस इंडस्ट्रीज, सहित घरेलू प्राइवेट ग्रुप्स को बुलाया था। न्यूक्लियर एनर्जी एक्ट में बदलावों में एक्सीडेंट में न्यूक्लियर इक्विपमेंट सप्लायर्स की ज़िम्मेदारी को लिमिट करना शामिल था, जो एक लंबे समय से चली आ रही चिंता थी। इस कदम का मकसद जनरल इलेक्ट्रिक, वेस्टिंगहाउस इलेक्ट्रिक और EDF जैसे विदेशी वेंडर्स की दिलचस्पी फिर से जगाना था।

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