Tuesday, 29 Sep 2026

पाक के बाद बांग्लादेश पर एर्दोगन की नजर

अंकारा (26 अगस्त 26)। दक्षिण एशिया में तुर्की की बढ़ती सक्रियता को लेकर भारत के लिए नई रणनीतिक चुनौती की चर्चा तेज हो गई है। पाकिस्तान के साथ अंकारा के गहरे रक्षा संबंधों के बाद अब बांग्लादेश के साथ उसके बढ़ते संपर्क और ढाका की संभावित सुरक्षा साझेदारियों ने क्षेत्रीय समीकरणों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।सेंटर फॉर जियोपॉलिटिक्स एंड स्ट्रैटजिक स्टडीज की फेलो डॉ. इंद्राणी तालुकदार ने अपने विश्लेषण में तुर्की-पाकिस्तान-सऊदी अरब-बांग्लादेश के संभावित रणनीतिक समीकरण को भारत के लिए चुनौतीपूर्ण बताया है। हालांकि, इसे सीधे तौर पर किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन के रूप में पेश करना अभी जल्दबाजी होगी। 

बांग्लादेश लंबे समय से भारत, चीन और अमेरिका जैसी बड़ी शक्तियों के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। लेकिन देश में राजनीतिक बदलाव, आर्थिक दबाव और सुरक्षा साझेदारों में विविधता लाने की इच्छा के कारण ढाका अब नए विकल्पों पर भी नजर डाल रहा है। पाकिस्तान के साथ हाल के वर्षों में बढ़ते संपर्क इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं। तुर्की के साथ रक्षा और सैन्य सहयोग बढ़ना भी इसी व्यापक बदलाव को दर्शा सकता है। सबसे ज्यादा चर्चा बांग्लादेश के ‘मक्का फ्रेमवर्क’ से संभावित जुड़ाव को लेकर है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बांग्लादेश अभी इसका औपचारिक हस्ताक्षरकर्ता नहीं है। इसलिए यह कहना कि ढाका पहले ही किसी तुर्की-पाकिस्तान-सऊदी सैन्य गठबंधन का हिस्सा बन चुका है, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। लेकिन यदि भविष्य में बांग्लादेश इसमें पर्यवेक्षक या किसी अन्य भागीदारी के रूप में शामिल होता है, तो दक्षिण एशिया में सुरक्षा सहयोग का नया नेटवर्क बन सकता है। यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक पहलू है।

अगर तुर्की और बांग्लादेश के बीच रक्षा सहयोग काफी गहरा होता है और पाकिस्तान भी इसमें सक्रिय भूमिका निभाता है, तो भारत की पूर्वी सीमा के करीब तुर्की की रणनीतिक पहुंच बढ़ सकती है।इसका मतलब यह नहीं है कि तुर्की सीधे भारत के खिलाफ सैन्य मोर्चा खोल देगा। लेकिन सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा उपकरणों की बिक्री, सुरक्षा सहयोग और राजनीतिक समन्वय जैसे क्षेत्रों में बढ़ती मौजूदगी भारत के लिए निगरानी का विषय जरूर बन सकती है। तुर्की और पाकिस्तान के बीच रक्षा संबंध पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं। अंकारा ने पाकिस्तान को सैन्य तकनीक, रक्षा उपकरण और प्रशिक्षण के क्षेत्र में सहयोग दिया है। दोनों देशों के बीच राजनीतिक संबंध भी मजबूत हैं। खासकर कश्मीर मुद्दे पर तुर्की के बयानों को लेकर भारत ने कई बार असहमति जताई है। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन द्वारा कश्मीर पर पाकिस्तान के पक्ष में दिए गए बयानों ने नई दिल्ली और अंकारा के संबंधों में तनाव बढ़ाया है।

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