Wednesday, 30 Sep 2026

पाक सेना का आधी रात को बलूचिस्तान पर हमला

सुराब (13 अगस्त 26)। बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सैन्य एयरस्ट्राइक ने पूरे इलाके को दहला दिया है। सुराब जिले के गोअनधान गांव में रात करीब 2 बजे हुए हमले में 28 नागरिकों की मौत का दावा किया जा रहा है। मृतकों में 9 बच्चे और 7 महिलाएं शामिल बताए जा रहे हैं, जबकि 17 लोग घायल हुए हैं। सामने आई तस्वीरों और रिपोर्टों में मकानों के मलबे के बीच शवों और घायलों का जिक्र है। पाकिस्तानी सेना की ओर से इस हमले पर अभी तक आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना बलूचिस्तान के सुराब जिले के गोअनधान गांव में हुई। बताया जा रहा है कि रात करीब 2 बजे गांव के लोग अपने घरों में सो रहे थे, तभी हवाई हमला हुआ। हमले के बाद कई मकानों को भारी नुकसान पहुंचा और बड़ी संख्या में लोग मलबे में दब गए। स्थानीय स्तर से सामने आई जानकारी के मुताबिक, इस हमले में 28 नागरिकों की मौत हुई है। इनमें 9 बच्चे, 7 महिलाएं और 12 पुरुष शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा 17 लोग घायल हुए हैं और उनका इलाज चल रहा है। हमले के बाद सामने आई तस्वीरों और वीडियो को लेकर रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कई शव मलबे के नीचे दबे मिले। कुछ पीड़ितों की उम्र बेहद कम बताई जा रही है। इससे इस कार्रवाई में आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घायलों को स्थानीय स्तर पर इलाज के लिए ले जाया गया। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। 

इस घटना को बलूचिस्तान में पाकिस्तान विरोधी गतिविधियों और आजादी की मांग के बीच देखा जा रहा है। बलूचिस्तान में अलगाववादी आंदोलन लंबे समय से सक्रिय है और पाकिस्तान सरकार तथा सेना पर बलूच नागरिकों के खिलाफ दमन करने के आरोप लगते रहे हैं। बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और प्राकृतिक गैस, तांबा, सोना तथा दूसरे खनिज संसाधनों से बेहद समृद्ध माना जाता है। इसके बावजूद वहां लंबे समय से गरीबी, बेरोजगारी और विकास की कमी को लेकर शिकायतें रही हैं। बलूच संगठनों का आरोप है कि प्रांत के प्राकृतिक संसाधनों का फायदा स्थानीय लोगों को पर्याप्त रूप से नहीं मिलता। इसके अलावा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा यानी CPEC भी लंबे समय से विवाद का मुद्दा रहा है। बलूच राष्ट्रवादी संगठनों का कहना है कि बड़े प्रोजेक्ट्स में स्थानीय आबादी के हितों और अधिकारों की अनदेखी की गई है।

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