मॉस्को (31 मई 26)। रूस में मानव जीवन को लंबा करने और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने के लिए एक विशाल वैज्ञानिक कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का समर्थन प्राप्त है। लगभग 26 अरब डॉलर (करीब 22 लाख करोड़ रुपए) की इस सरकारी पहल का उद्देश्य जीन थेरेपी, पुनर्योजी चिकित्सा , बायोप्रिंटिंग और कृत्रिम अंग विकास जैसी तकनीकों के जरिए इंसानों की जीवन अवधि को काफी बढ़ाना है।
रूसी वैज्ञानिकों का दावा है कि भविष्य में मनुष्य की औसत आयु 150 वर्ष तक पहुंचाने की दिशा में शोध किया जा रहा है रूस की इस परियोजना में कई अत्याधुनिक तकनीकों पर एक साथ काम हो रहा है। जैसे - जीन थेरेपी के जरिए कोशिकाओं की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी करना। 3D बायोप्रिंटिंग से जीवित ऊतकों (टिश्यू) का निर्माण। जेनोट्रांसप्लांटेशन के माध्यम से आनुवंशिक रूप से संशोधित मिनी-पिग्स में मानव अंग विकसित करना। क्रायोथेरेपी और पुनर्योजी चिकित्सा पर शोध। भविष्य में अंगों की मरम्मत और प्रतिस्थापन को आसान बनाना।
2030 तक मानव अंग प्रत्यारोपण का लक्ष्य- रूसी वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि वे पहले ही मानव उपास्थि ऊतक, तथा एक कार्यशील चूहे की थायरॉइड ग्रंथि बायोप्रिंट करने में सफलता हासिल कर चुके हैं। अब उनका लक्ष्य 2030 तक पूर्ण मानव अंगों के निर्माण और प्रत्यारोपण की क्षमता विकसित करना है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी 150 साल तक जीवन बढ़ाने का दावा सैद्धांतिक स्तर पर है और इसे हासिल करने में दशकों लग सकते हैं। हालांकि उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करना, अंगों की मरम्मत करना और गंभीर बीमारियों के इलाज में सुधार जैसे लक्ष्य निकट भविष्य में संभव माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंगों को बार-बार बदला या पुनर्जीवित किया जा सके तो जीवनकाल में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
पुतिन की बेटी निभा रही अहम भूमिका- इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की निगरानी में पुतिन की बेटी मारिया वोरोन्त्सोवा की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। मारिया एक एंडोक्रिनोलॉजिस्ट हैं और लंबे समय से जैव-चिकित्सा अनुसंधान से जुड़ी रही हैं। उनके साथ प्रसिद्ध रूसी भौतिक विज्ञानी मिखाईल कोवालचुक भी इस परियोजना के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। मिखाइल कोवलचुक का मानना है कि अमरता पर बात करना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन विज्ञान तेजी से उस दिशा में बढ़ रहा है जहां मानव शरीर के क्षतिग्रस्त अंगों को नियमित रूप से बदला और मरम्मत किया जा सकेगा। उनके अनुसार भविष्य में विज्ञान इंसानों को कई गंभीर बीमारियों और उम्र संबंधी समस्याओं से बचाने में सक्षम हो सकता है।