नईदिल्ली (18 नवंबर 25)। बांग्लादेश की राजनीति में तूफ़ान खड़ा करने वाला ऐतिहासिक फैसला आखिरकार आ गया। इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ गंभीर अपराधों के लिए दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुना दी है। यह फैसला 400 पन्नों में दर्ज है और इसे छह अलग-अलग हिस्सों में सुनाया गया। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को फांसी दिए जाने का आदेश जारी हुआ है। इस पर अब भारत सरकार की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है।भारत ने कहा है कि वह इस फैसले पर ध्यान दे रहा है और बांग्लादेश के सर्वोत्तम हितों के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
इस संवेदनशील मामले की सुनवाई जस्टिस गुलाम मुर्तजा की अध्यक्षता वाली विशेष बेंच ने की। उनके साथ जस्टिस मोहम्मद शफीउल आलम महमूद और जस्टिस मोहम्मद मोहितुल हक एनाम चौधरी शामिल थे। ट्रिब्यूनल ने साफ कहा कि उन्होंने कई मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों, गवाहियों और घटनाओं की विस्तृत जांच के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि शेख हसीना ने नागरिकों पर भारी अत्याचार करवाए। फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई की शुरुआत हसीना की मंजूरी से हुई। ट्रिब्यूनल ने आरोपों का हवाला देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन दबाने के लिए हेलीकॉप्टर से विस्फोटक गिराने तक के आदेश दिए गए। सुनवाई में दर्ज किया गया कि अवामी लीग के कार्यकर्ता भी सड़कों पर उतरे और नेतृत्व की जानकारी में योजनाबद्ध हमले किए गए।
भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में साफ किया है कि भारत ने बांग्लादेश के 'अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण' द्वारा शेख हसीना के खिलाफ सुनाए गए फैसले को नोट किया है। भारत ने दो टूक कहा कि एक करीबी पड़ोसी होने के नाते वह बांग्लादेश की जनता के सर्वोत्तम हितों के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय ने आगे कहा बांग्लादेश में शांति, लोकतंत्र, समावेशन और स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है। भारत हमेशा इन मूल्यों के समर्थन में खड़ा रहेगा। इसी के साथ आगे यह भी कहा है कि भारत भविष्य में भी बांग्लादेश से जुड़े सभी पक्षों से रचनात्मक संवाद जारी रखेगा, ताकि देश में स्थिरता और लोकतांत्रिक माहौल कायम रहे।