उज्जैन (23 अगस्त 26)। मध्यप्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ-2028 के मद्देनजर मार्ग चौड़ीकरण को लेकर गोपाल मंदिर के समीप स्थित शाही मस्जिद को नगर पालिका निगम द्वारा जारी नोटिस का विरोध बढ़ता जा रहा है। नगर निगम ने गत 14 अगस्त को शाही मस्जिद वक्फ पंचायत मोचीयान को सड़क चौड़ीकरण के लिए नोटिस जारी किया था। शहर काजी, शाही वक्फ पंचायत सहित मुस्लिम समाज द्वारा नोटिस पर आपत्ति जताई जा रही है। शाही मस्जिद वक्फ पंचायत मोचीयान ने नगर निगम के भवन अधिकारी द्वारा जारी सूचना पत्र को अपूर्ण, अस्पष्ट और अवैधानिक बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई है।
पंचायत के प्रबंधक मोहम्मद मोहसीन और अरशद हुसैन की ओर से 18 अगस्त को निगम में प्रस्तुत जवाब में कहा गया है कि नोटिस में सड़क के मध्य भाग से दोनों ओर समान रूप से भूमि लिए जाने का कोई उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि शहर के अन्य हिस्सों में सड़क के मध्य से दोनों ओर समान रूप से भूमि ली गई है, लेकिन इस मामले में आवश्यक तथ्यों को स्पष्ट नहीं किया गया है। नोटिस में वर्तमान सड़क की चौड़ाई और कितनी भूमि ली जानी है, इसका भी स्पष्ट उल्लेख नहीं है तथा कोई मानचित्र संलग्न नहीं किया गया है। पंचायत ने ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि शाही मस्जिद 100 वर्ष से अधिक पुरानी और मुगलकालीन मस्जिद है। पंचायत के अनुसार 17 मार्च 1925 को सिंधिया राजघराने के चेयरमैन, टाउन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट, ग्वालियर सरकार लश्कर की ओर से शहर काजी को पत्र जारी किया गया था, जिसमें कुछ भूमि अधिग्रहित किए जाने के बाद शेष मस्जिद को यथावत रखा गया था। पंचायत ने यह भी बताया कि 13 सितंबर 1985 के मध्यप्रदेश शासन के राजपत्र में मस्जिद और उसकी पैमाइश का स्पष्ट उल्लेख है। इसके अलावा वर्ष 1975 में आवागमन सुगम बनाने के लिए मस्जिद की ओर से स्वेच्छा से भूमि दिए जाने का भी दावा किया गया है। पंचायत का कहना है कि उस समय सामने स्थित मकान से कोई भूमि अधिग्रहित नहीं की गई थी।
पंचायत के अनुसार, वर्तमान में सड़क लगभग 40 फीट चौड़ी है और आवागमन में कोई बाधा नहीं है। पंचायत ने आरोप लगाया कि केवल धार्मिक स्थल को हटाने के उद्देश्य से कारर्वाई की जा रही है और इसे द्वेषपूर्ण बताया। पंचायत ने नगर निगम से मांग की है कि सड़क के मध्य भाग को स्पष्ट कर दोनों ओर समान रूप से भूमि लिए जाने का निर्णय होने तक मस्जिद के किसी भी हिस्से को नहीं तोड़ा जाए। साथ ही नगर निगम द्वारा जारी सूचना पत्र को निरस्त करने की मांग की गई है। आपत्ति के साथ पंचायत ने ग्वालियर सरकार का पत्र, राजपत्र की प्रति, चालान, तहसीलदार के नोटिस तथा वर्ष 1975 और 1979 के मानचित्र सहित अन्य दस्तावेज भी निगम में प्रस्तुत किए हैं।