Wednesday, 07 Oct 2026

बिना अनुमति के एक भी पेड़ नहीं काटे जाएंगे: हाईकोर्ट

जबलपुर (28 नवंबर 25)। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर में गुरुवार को याचिका क्रमांक 46565/2025 पर हुई सुनवाई में राज्य में बड़े पैमाने पर हो रही पेड़ों की कटाई पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा एवं न्यायमूर्ति विनय सराफ की पीठ ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को कड़े निर्देश जारी किए। 

सुनवाई के दौरान विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से स्वीकार किया गया कि बीते समय में पेड़ कटाई को लेकर कई गड़बड़ियां हुईं और फिलहाल 'वृक्ष प्रत्यारोपण नीति' राज्य में उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण कई कार्य अस्पष्ट नियमों के तहत किए गए। सरकार ने बताया कि विकास परियोजनाओं के लिए अब तक बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए हैं और कुछ पेड़ों की कटाई तथा ट्रांसप्लांटेशन का प्रस्ताव अब भी बाकी है।  अदालत ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है जिसमें अब तक काटे गए पेड़ों की संख्या, प्रस्तावित कटाई व ट्रांसप्लांटेशन का विवरण, ट्रांसप्लांट किए जाने वाले पेड़ों के गंतव्य, हरित आवरण पुनर्स्थापना की योजना तथा नए लगाए जाने वाले पौधों की संख्या, प्रजाति, आयु एवं स्थान का पूरा ब्योरा शामिल होना अनिवार्य होगा। सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता नितिन सक्सेना की ओर से अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता ने तर्क दिया कि भोपाल नगर निगम में वृक्ष अधिकारी अपने अधिकार अवैध रूप से अन्य अधिकारियों को सौंप रहे हैं, जो मप्र वृक्षों का परिरक्षण अधिनियम 2001 तथा नगर पालिक अधिनियम 1956 के अनुरूप नहीं है।  अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि वृक्ष अधिकारी की नियुक्ति केवल 2001 के अधिनियम के तहत ही मान्य होगी और किसी अन्य अधिकारी को शक्ति हस्तांतरण स्वीकार्य नहीं है। कोटर् ने ट्रांसप्लांटेशन संबंधी तस्वीरें देखकर तीखी नाराज़गी व्यक्त की और कहा कि मौजूदा प्रक्रिया संरक्षण के उद्देश्य को विफल करती है। न्यायालय ने राज्य को तत्काल 'वृक्ष प्रत्यारोपण नीति' तैयार करने का भी निर्देश दिया। 

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