इंदौर (09 सितंबर 26)। शहर की बदहाल यातायात व्यवस्था को लेकर हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने एक बार फिर प्रशासन और पुलिस के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। विविध जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की ओर से ड्रोन, एआई तकनीक और नए प्रयोगों की बातें तो कही जा रही हैं, लेकिन इनका असर सड़कों पर नजर नहीं आ रहा। कोर्ट ने कहा कि कई वाहन गलत नंबर प्लेट, बिना नंबर प्लेट और हूटर-सायरन लगाकर चल रहे हैं। इनमें से कुछ वाहन हाई कोर्ट के सामने से गुजरते हुए भी दिखाई दिए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि शहर में यातायात व्यवस्था में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। नियमों का उल्लंघन खुलेआम हो रहा है। हाई कोर्ट के सामने तक ऐसे वाहन नजर आ रहे हैं, जिनमें गलत या बिना नंबर प्लेट के साथ हूटर और सायरन लगे हैं। कोर्ट ने अधिकारियों की ओर से किए जा रहे दावों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर पर भी सवाल उठाया। याचिकाकर्ता पूर्व पार्षद महेश गर्ग की ओर से अधिवक्ता मनीष यादव और अधिवक्ता अनस मकरानी ने पिछली सुनवाई के आदेश का हवाला देते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने प्रशासन से शहर में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की संख्या और चौराहों पर तैनात जवानों की जानकारी शपथपत्र के माध्यम से मांगी थी। इस पर शासन की ओर से बताया गया कि शहर के विभिन्न चौराहों पर 660 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और सभी स्थानों पर जवान तैनात रहते हैं। शासन के जवाब पर याचिकाकतार्ओं के अधिवक्ताओं ने आपत्ति जताई। अधिवक्ता मनीष यादव और अनस मकरानी ने कहा कि कैमरे और जवान तैनात होने के बावजूद शहर में यातायात की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। उनका आरोप था कि पुलिस मुख्य रूप से ड्रिंक एंड ड्राइव के चालान बनाने में व्यस्त रहती है, जबकि अन्य यातायात नियमों का उल्लंघन लगातार जारी है। इस पर कोर्ट ने भी कहा कि उसे जमीनी स्तर पर कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा। सुनवाई जस्टिस संदीप एन. भट्ट और जस्टिस गजेंद्र सिंह की खंडपीठ के समक्ष हुई।
हाई कोर्ट ने कहा कि केवल चालान बनाने से यातायात व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है। शहर में लगातार ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी हुई है। कोर्ट ने भारी वाहनों की शहर में एंट्री को लेकर भी सवाल किया। कोर्ट ने इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश का उल्लेख किया, जिसमें शहरों में दिन के समय भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक से संबंधित बात कही गई है। शासन की ओर से इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब देने के लिए समय मांगा गया। कोर्ट ने अगली सुनवाई 28 सितंबर वाले सप्ताह में निर्धारित की है। इसमें यातायात व्यवस्था, भारी वाहनों की एंट्री और अब तक किए गए उपायों पर शासन से विस्तृत जवाब अपेक्षित है।