लंदन (01 दिसंबर 25)। ब्रिटेन में कीर स्टार्मर सरकार द्वारा पेश किए गए नए बजट ने देश की राजनीति को हिला कर रख दिया है। मीडिया और विपक्ष इस बजट को “Benefits Street Budget” कह रहे हैं यानी ऐसा बजट जो कामकाजी लोगों पर भारी टैक्स बढ़ाकर वेलफेयर लाभों को बढ़ावा देता है। बढ़ते जन-रोष और राजनीतिक संकट के बीच प्रधानमंत्री को खुद सामने आकर डैमेज कंट्रोल करना पड़ा।
चांसलर रेचल रीव्स ने बजट में £30 बिलियन की टैक्स बढ़ोतरी की घोषणा की है। इसके कारण लगभग 10 लाख ब्रिटिश नागरिक पहली बार 40% इनकम टैक्स स्लैब में आएंगे।2030-31 तक हर चार में से एक कामगार हाई टैक्स रेट देगा। वेलफेयर स्कीम्स पर खर्च बढ़ाया गया है। 'टू-चाइल्ड बेनिफिट कैप' हटने से लाभार्थियों की संख्या और फंडिंग दोनों बढ़ेंगे। विपक्ष और टैक्सपेयर्स समूहों का आरोप है कि यह बजट मेहनतकश और टैक्स देने वाले मध्यम वर्ग पर सीधा हमला। सबसे बड़ा आरोप- क्या सरकार ने वित्तीय आंकड़े छुपाए? बजट के बाद एक बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब सामने आया कि OBR (Office for Budget Responsibility) ने सरकार को बताया था कि देश के फाइनेंसेज़ में घाटा नहीं, बल्कि £4.2 बिलियन का सरप्लस था। इसके बावजूद बजट में टैक्स बढ़ोतरी को 'आर्थिक गड्ढे' का हवाला देकर सही ठहराया गया। विपक्ष इसे 'झूठ बोलकर जनता को गुमराह करने' का मामला बता रहा है। इसी कारण इसे 'Reeves Lie Scandal' कहा जा रहा है।
लगातार तीखे सवालों और आलोचनाओं के बीच रीव्स ने इंटरव्यू में कहा:“पिछले 16 महीनों में कई लोगों ने मुझे ख़त्म समझा। लेकिन आप मेरी राजनीतिक obituary आज नहीं लिखने वाले। 'उन्होंने कहा कि टैक्स बढ़ोतरी 'ज़रूरी और न्यायसंगत' है और वे किसी भी वादाखिलाफी को स्वीकार नहीं करतीं। तेज़ी से फैल रहे जनाक्रोश और राजनीतिक तूफान के बीच पीएम कीर स्टार्मर ने जनता और मीडिया को शांत करने के लिए बयान जारी किया और बताया कि वेलफेयर सिस्टम में सुधार लाए जाएंगे। उन्होंने युवा बेरोज़गारी और वर्क-इंसेंटिव को संबोधित करने का वादा किया और कहा कि आने वाले भाषण में बड़े आर्थिक सुधारों की घोषणा होगी।