Monday, 28 Sep 2026

भागीरथपुरा कांड: पोटेशियम क्लोराइड युक्त पानी पीने से मौत

इंदौर (05 मार्च 26)। भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में गुरुवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई हुई। इस दौरान जांच आयोग ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट पेश कर दी। अदालत ने विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए आयोग को एक माह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को तय की गई है। हालांकि, याचिकाकर्ता की तरफ से पेन ड्राइव में जो साक्ष्य सौंपे गए उसमें बताया गया कि भागीरथपुरा की पानी की टंकी में पोटेशियम क्लोराइड मिलाया था। यही पानी वहां के रहवासी पी रहे थे, जिससे उनकी तबियत बिगड़ी और बाद में मौत हो गई।

मामले की सुनवाई विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने की। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में गठित एकल सदस्यीय जांच आयोग की ओर से प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। अदालत ने इस रिपोर्ट पर विस्तृत बहस के लिए 6 अप्रैल की तारीख तय की है। साथ ही आयोग को एक कर्मचारी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए हैं, जो भागीरथपुरा क्षेत्र के रहवासियों से प्राप्त शिकायतें, आवेदन, साक्ष्य और दस्तावेजों का समन्वय कर आयोग को उपलब्ध कराएगा। सुनवाई में यह भी सामने आया कि मामले से संबंधित रिकॉर्ड इंदौर नगर निगम ने अब तक आयोग को उपलब्ध नहीं कराए हैं। इस पर अदालत ने निगम को निर्देश दिए कि वह 10 दिनों के भीतर प्राथमिकता से सभी आवश्यक दस्तावेज आयोग को सौंपे। सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट अजय बागडिया और एडवोकेट सायली पुरंदरे ने भी पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि भागीरथपुरा के चार से पांच रहवासियों से उन्होंने बात की है, जिसमें रहवासियों ने स्पष्ट किया कि उनके यहां पर पानी की टंकी से ही पानी सप्लाई हो रहा था और वे वही पानी पी रहे थे। कोर्ट ने नगर निगम के अफसरों से भी घटना से संबंधित दस्तावेज सौंपने के आदेश दिए हैं।

पहले कोर्ट ने कहा था आई-वॉश- इससे पहले की सुनवाई में अदालत ने शासन और नगर निगम की रिपोर्ट पर सख्त टिप्पणी करते हुए उसे 'आई-वॉश' करार दिया था। खंडपीठ ने कहा था कि यह मामला गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट से जुड़ा है और स्वच्छ पेयजल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। अदालत ने रिपोर्ट में प्रयुक्त ह्यवर्बल आॅटॉप्सीह्ण शब्द पर भी आपत्ति जताई और पूछा कि क्या यह कोई मान्य चिकित्सकीय शब्द है या अधिकारियों द्वारा गढ़ा गया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि प्रस्तुत रिपोर्ट विश्वसनीय नहीं है।

स्वतंत्र जांच आयोग गठित- मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने पूर्व में स्वतंत्र जांच आयोग गठित करने के निर्देश दिए थे। आयोग को जल प्रदूषण के कारणों, प्रशासनिक लापरवाही, जनहानि, चिकित्सकीय प्रभाव और भविष्य में सुधारात्मक उपायों की जांच कर रिपोर्ट पेश करनी है। कोर्ट में एडवोकेट रितेश इनानी, एडवोकेट नीरज सोनी और एडवोकेट ऋषि कुमार चौकसे आदि मौजूद थे। अदालत ने आयोग से एक माह में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

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