नईदिल्ली (21 मई 24)। भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने नई दिल्ली में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के 15वें वार्षिक दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विशेष रूप से संबोधित किया। वेंकटरमणी ने अपने संबोधन में बताया कि कैसे प्रतिस्पर्धा के विनियमन की आवश्यकता प्रतिस्पर्धा में अनुचित प्रथाओं की रोकथाम, मूल्य निर्धारण और उपभोक्ता कल्याण के क्षेत्रों में फैल गई है तथा निर्धारण कारक के रूप में सामान्य लोगों की भलाई के युग में पहुँच गई है।
वेंकटरमणी ने पॉल सैमुएलसन के इस कथन का उल्लेख किया कि बाजार काम कर सकते हैं, लेकिन केवल सरकार द्वारा बनाए गए सुरक्षा उपायों के साथ। उन्होंने कहा कि ऐसे सुरक्षा उपायों में प्रतिस्पर्धा विनियमन सम्मिलित हैं। वेंकटरमणी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि मुक्त बाजार के इंजन और सामाजिक लाभ की छत्रछाया के बीच सह-अस्तित्व के नए विचारों को गढ़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रोत्साहनों और बाजार के विचारों के स्वतंत्र उपयोग के बीच मार्गदर्शन का कार्य एक अलग कानूनी नवाचार होगा, जो अन्य नियामक विचारों से अलग होगा।
वेंकटरमणी ने कुछ व्यापक पहलुओं पर बात की, जैसे प्रतिस्पर्धा कानूनों का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उपयोग और वहां से शुरू होना; सामान्य रूप से नियामक कानूनों के लिए चुनौतियां; उपभोक्ताओं और आपूर्तिकर्ताओं तथा आपूर्तिकर्ताओं के बीच आर्थिक शक्ति के पुनर्वितरण का कार्य; नए-उभरते स्थिरता के विचार और प्रतिस्पर्धा नीति, क्योंकि स्थिरता का व्यवसाय व्यापार की स्थिरता को नियंत्रित करेगा।