अखनूर (13 जुलाई 25)। जम्मू और कश्मीर के अखनूर सेक्टर से एक दिलचस्प और संवेदनशील मामला सामने आया है। भारतीय सेना ने यहां गिग्रियल बटालियन की नियंत्रण रेखा (LoC) पर स्थित एक चौकी से दुर्लभ प्रजाति के पैंगोलिन को सुरक्षित बचाया है। इस घटना का वीडियो समाचार एजेंसी ANI ने जारी किया है। सेना द्वारा बचाए गए पैंगोलिन को वन्यजीव विभाग को सौंप दिया गया है। इस सराहनीय कदम की व्यापक रूप से सराहना की जा रही है, क्योंकि पैंगोलिन न केवल एक दुर्लभ बल्कि संकटग्रस्त प्रजाति भी है। पैंगोलिन, जिसे आम बोलचाल में ‘वज्रशल्क’ या ‘चींटीखोर’ भी कहा जाता है, एक रात्रिचर (रात में सक्रिय रहने वाला) जीव है। यह मुख्य रूप से भारत, श्रीलंका, चीन और नेपाल में पाया जाता है। इसकी सबसे खास बात है इसका शरीर, जो कठोर शल्कों (स्केल्स) से ढका होता है। यही शल्क इसे शिकारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
अनूठी आत्मरक्षा प्रणाली: खतरे की स्थिति में पैंगोलिन खुद को गोल कर लेता है, जिससे उसका नाजुक हिस्सा पूरी तरह से ढक जाता है। यह आत्मरक्षा की एक अत्यंत प्रभावी तकनीक मानी जाती है।
अद्भुत भोजन प्रणाली: पैंगोलिन का प्रमुख आहार चींटियां और दीमक हैं। इसकी लंबी और चिपचिपी जीभ, जो उसके शरीर से भी लंबी हो सकती है, कीड़ों को पकड़ने और संकरे स्थानों से निकालने में मदद करती है।
दुनिया का सबसे अधिक तस्करी किया जाने वाला स्तनपायी: इसके शल्कों और मांस की अवैध अंतरराष्ट्रीय मांग के कारण यह जीव गंभीर संकट में है। IUCN की रेड लिस्ट में यह गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों में शामिल है।