नईदिल्ली (15 दिसंबर 24)। 53 साल पहले जब पाकिस्तानी जनरल नियाजी ने भारतीय सेना के सामने सरेंडर किया था, उसकी एक ऐतिहासिक तस्वीर ने भारतीय सेना की शक्ति को दुनिया के सामने रखा था। लेकिन अब, भारतीय थलसेना प्रमुख के ऑफिस में वह तस्वीर हटा दी गई है और उसकी जगह एक नई पेंटिंग लगाई गई है, जो भारतीय सेना के नए सैन्य फोकस को दर्शाती है। यह पेंटिंग न केवल सेना की आधुनिक रणनीति और तकनीकी विकास को दिखाती है, बल्कि यह स्पष्ट संदेश भी देती है कि अब भारत का ध्यान पाकिस्तान पर नहीं, बल्कि चीन पर केंद्रित है। 1971 की प्रसिद्ध तस्वीर में जनरल नियाजी भारतीय सेना के सामने सरेंडर करते हुए नजर आ रहे थे, लेकिन अब थलसेना प्रमुख के लॉन्ज में उस तस्वीर की जगह एक नई पेंटिंग ने ली है। इस पेंटिंग में लद्दाख के पैंगांग लेक का दृश्य दिखाई दे रहा है, जिसमें आधुनिक टैंक, बोट, ऑल-टेरेन व्हीकल्स और अपाचे हेलिकॉप्टर जैसे युद्ध उपकरण हैं। पेंटिंग में महाभारत के युद्ध में अर्जुन के रथ को खींचने वाले भगवान कृष्ण, चाणक्य की युद्ध नीति, और भारतीय सेना के तीनों अंगों के समन्वय को दिखाने वाले चित्र भी हैं। यह सब मिलकर एक संदेश देते हैं कि अब भारतीय सेना का मुख्य फोकस पाकिस्तान पर नहीं, बल्कि चीन पर है। दुनिया में बदलते समय और रणनीतियों के साथ भारतीय सेना ने भी अपनी रणनीति में बदलाव किया है। पेंटिंग में दिखाए गए आधुनिक सैन्य उपकरण, जैसे टैंक, बोट, हेलिकॉप्टर और ऑल-टेरेन व्हीकल्स, यह दर्शाते हैं कि भारतीय सेना अब समन्वित तरीके से और उच्च तकनीकी स्तर पर युद्ध के लिए तैयार है। रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल अशोक कुमार का कहना है कि यह पेंटिंग भारतीय सेना के तीनों अंगों – थलसेना, वायुसेना और नौसेना – के समन्वय को दिखाती है, जो मिलकर किसी भी संभावित युद्ध में तेज और प्रभावी तरीके से प्रतिक्रिया देने के लिए सक्षम हैं। इसके अलावा, यह पेंटिंग आत्मनिर्भर भारत की सैन्य रणनीति और सोच को भी प्रदर्शित करती है, जिसमें भारतीय सेना ने आधुनिक तकनीक और आत्मनिर्भरता के आधार पर अपनी ताकत को बढ़ाया है।