इंदौर (01 जनवरी 25)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने घोषणा की कि भारत का रक्षा निर्यात एक दशक पहले के 2,000 करोड़ रुपये से बढ़कर रिकॉर्ड 21,000 करोड़ रुपये को पार कर गया है। उन्होंने 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। मध्य प्रदेश की महू छावनी स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में अधिकारियों को संबोधित करते हुए, सिंह ने उभरती तकनीकों के साथ कदम मिलाने और सीमांत प्रौद्योगिकियों में महारत हासिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सैन्य प्रशिक्षण केंद्र भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए सैनिकों को तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा, 'हमारा रक्षा निर्यात, जो एक दशक पहले 2,000 करोड़ रुपये था, आज 21,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया है। हमने 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है।' उन्होंने बताया कि भारत में निर्मित उपकरण कई देशों को निर्यात किए जा रहे हैं। राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में सूचना युद्ध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित युद्ध, साइबर हमले, विद्युत-चुंबकीय युद्ध और अंतरिक्ष युद्ध जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन खतरों का सामना करने के लिए सेना को अत्याधुनिक प्रशिक्षण और उपकरणों से लैस करना आवश्यक है। रक्षा मंत्री ने महू स्थित प्रशिक्षण केंद्रों की प्रशंसा की और कहा कि ये केंद्र लगातार अपने पाठ्यक्रमों को अपडेट कर कर्मियों को हर चुनौती के लिए तैयार कर रहे हैं। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि मोदी सरकार तीनों सेनाओं के बीच एकीकरण और संयुक्तता को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।