Wednesday, 30 Sep 2026

भारत की पहली एंटी-टेरर पॉलिसी 'प्रहार' जारी

नईदिल्ली (24 फरवरी 26)। भारत सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी पहली व्यापक राष्ट्रीय काउंटर-टेररिज्म पॉलिसी और स्ट्रैटेजी 'प्रहार' जारी कर दी है। यह दस्तावेज Ministry of Home Affairs (MHA) द्वारा सार्वजनिक किया गया और मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। करीब 8-9 पन्नों की इस नीति में आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को स्पष्ट रूप से दोहराया गया है। साथ ही बदलते वैश्विक और तकनीकी खतरों से निपटने के लिए एक समन्वित और बहु-आयामी ढांचा प्रस्तुत किया गया है।

 'प्रहार' दस्तावेज में साफ कहा गया है कि भारत आतंकवाद को किसी धर्म, जाति, राष्ट्रीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ता। यह नीति आतंकवाद को एक आपराधिक और सुरक्षा चुनौती के रूप में देखती है, न कि किसी समुदाय विशेष से जुड़ी पहचान के रूप में। नई रणनीति में कई उभरते और पारंपरिक खतरों को रेखांकित किया गया है: सीमा पार प्रायोजित आतंकवाद, विशेष रूप से जिहादी संगठनों और उनके फ्रंटल नेटवर्क के जरिए। वैश्विक आतंकी नेटवर्क जैसे Al-Qaeda और Islamic State (ISIS) की स्लीपर सेल गतिविधियां। ड्रोन के माध्यम से हथियार, नशीले पदार्थ और भर्ती गतिविधियां। साइबर हमले, जिनमें आपराधिक हैकर्स और राष्ट्र-प्रायोजित तत्व शामिल हैं। सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स, डार्क वेब और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल फंडिंग और कट्टरपंथ फैलाने के लिए। CBRNED (केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर, एक्सप्लोसिव और डिजिटल) सामग्री का दुरुपयोग।

आतंकी संगठनों और संगठित अपराध गिरोहों के बीच बढ़ता गठजोड़। संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा पर फोकस नीति में ऊर्जा, रेलवे, विमानन, बंदरगाह, रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। जमीन, समुद्र और वायु मार्ग से आने वाले खतरों के खिलाफ सुरक्षा तंत्र को तकनीकी रूप से मजबूत करने पर जोर है।  'प्रहार' नीति में एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, कानूनों में समय-समय पर संशोधन, राज्यों की ATS यूनिट्स को मजबूत करना, तकनीकी निवेश बढ़ाना और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी जैसे बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया है। यह रणनीति भारत को पारंपरिक और आधुनिक-दोनों तरह के आतंकवादी खतरों से निपटने के लिए एकीकृत और सक्षम ढांचा प्रदान करती है। नीति में एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, कानूनों में समय-समय पर संशोधन, राज्यों की ATS यूनिट्स को मजबूत करना, तकनीकी निवेश बढ़ाना और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी जैसे बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया है। यह रणनीति भारत को पारंपरिक और आधुनिक-दोनों तरह के आतंकवादी खतरों से निपटने के लिए एकीकृत और सक्षम ढांचा प्रदान करती है।

Tags:

Follow us

This question is not available..!