Tuesday, 06 Oct 2026

भारत की समृद्ध चिकित्सकीय ज्ञान परंपरा: राज्यपाल

भोपाल (06 अक्टूबर 26)। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि नाड़ी विश्लेषण विज्ञान, भारत की समृद्ध चिकित्सकीय ज्ञान परंपरा है। यह विज्ञान के साथ भारतीय ज्ञान की गौरवशाली विरासत भी है। आधुनिक तकनीक और आयुष विज्ञान के साथ नाड़ी विश्लेषण को जोड़ना और विस्तारित करना स्वस्थ, सशक्त और विकसित भारत बनाने का मार्ग है। उन्होंने संगोष्ठी के आयोजन की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि 'सबके लिए स्वास्थ्य' के लक्ष्य की पूर्ति में आयुर्वेद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, क्योंकि यह स्वस्थ जीवनशैली और स्व-देखभाल को बढ़ावा देता है। नाड़ी विश्लेषण, कम खर्चीली, बिना किसी शारीरिक नुकसान की जाँच विधि है, जिसमें जटिल उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती है। इसलिए नाड़ी विश्लेषण ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सस्ती, सुलभ और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के द्वारा जन स्वास्थ्य को नया आयाम दे सकती है।

राज्यपाल पटेल मंगलवार को नाड़ी विश्लेषण - 2026 पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। संगोष्ठी का आयोजन, राष्ट्रीय आयुष मिशन और पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में 'नाड़ी परीक्षा की व्यवहारिक तकनीकों की खोज एवं निदान में नाड़ी का नैदानिकी महत्व' विषय पर किया गया था। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि आज दुनिया आयुर्वेद केहॉलिस्टिक विजन और जीवन दर्शन की ओर लौट रही है। आयुर्वेद आरोग्य का ऐसा विज्ञान है, जो रोग के उपचार से आगे बढ़कर स्वस्थ जीवन और वेलनेस को बढ़ावा देता है। इसके बहुउद्देश्यीय महत्व के कारण आयुर्वेद का भविष्य स्वर्णिम है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, हमें अनुशासन सिखाता है। मौसम के अनुसार खान-पान और जीवन शैली में परिवर्तन का मार्गदर्शन देता है। आयुष की अलग-अलग विधाएं भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। योग, हौम्योपैथी और नैचुरोपैथी हर घर-हर व्यक्ति तक पहुँच गई है। परिणामस्वरूप आज विश्वभर में इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासित जीवनशैली और संयमित खान-पान की उपयोगिता बताई। सभी को नियमित व्यायाम, पौष्टिक आहार, भरपूर नींद और पर्याप्त पानी को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी।

राज्यपाल ने राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ भगवान धन्वतरी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया। उनका आयुष विभाग के प्रमुख सचिव शोभित जैन ने पौधा और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। राज्यपाल ने 'आयु वर्धनम्-सिकल सेल' लघु पुस्तिका का लोकार्पण किया। भारत के प्रतिष्ठित नाड़ी विशेषज्ञों का सम्मान किया। महाविद्यालय परिसर में औषधीय पौधे का रोपण किया। कार्यक्रम में विधायक भगवानदास सबनानी ने आयुर्वेद को आगे बढ़ाने में महाविद्यालय की सतत और सक्रिय भूमिका की सराहना की। आभार आयुष विभाग की आयुक्त उमा माहेश्वरी ने व्यक्त किया। संगोष्ठी का प्रारंभ और समापन राष्ट्रीय गीत एवं राष्ट्रीय गान से हुआ। कार्यक्रम में पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य उमेश शुक्ला, नाड़ी विशेषज्ञ, महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के संकाय प्रमुख, आचार्यगण और विद्यार्थी उपस्थित थे।

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