नईदिल्ली (24 सितंबर 26)। भारत और जर्मनी के बीच प्रस्तावित पनडुब्बी साझेदारी पर बड़ा अपडेट सामने आया है। भारत में जर्मनी की रक्षा कंपनी थाइसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स के साथ प्रस्तावित परियोजना को लेकर जर्मन राजदूत जास्पर विक ने कहा है कि भारत की ओर से जरूरी मंजूरियां पूरी होते ही जर्मनी समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार है। जर्मन राजदूत ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना केवल जर्मन पनडुब्बियों को भारत को बेचने तक सीमित नहीं होगी। उनके मुताबिक इसका प्रमुख उद्देश्य भारत में पनडुब्बियों का उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण है।
जास्पर विक ने कहा कि इस प्रस्ताव की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह वास्तविक साझेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह जर्मन कंपनी द्वारा भारत को तैयार पनडुब्बियां बेचने की परियोजना नहीं है, बल्कि भारत में उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण पर आधारित साझेदारी है। राजदूत के अनुसार, इस सहयोग का फायदा केवल संबंधित रक्षा कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत के व्यापक समुद्री औद्योगिक तंत्र को भी इससे लाभ मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी से समुद्री क्षेत्र में काम करने वाली कई कंपनियों और पूरे औद्योगिक तंत्र को फायदा होगा।
भारत की मंजूरी का इंतजार समझौते पर हस्ताक्षर कब होंगे, इस सवाल पर जर्मन राजदूत ने कहा कि जर्मनी किसी भी समय आगे बढ़ने के लिए तैयार है। फिलहाल भारत की विभिन्न संबंधित प्राधिकरणों से अंतिम मंजूरियों का इंतजार है। उन्होंने कहा कि जैसे ही भारतीय पक्ष जरूरी मंजूरियां पूरी कर लेता है, दोनों देश इस महत्वपूर्ण साझेदारी को आगे बढ़ा सकते हैं। यह प्रस्तावित साझेदारी भारत की प्रोजेक्ट-75(आई) पनडुब्बी परियोजना से जुड़ी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इसके तहत भारत में छह आधुनिक पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण की योजना है। जर्मनी की TKMS और भारतीय कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के बीच साझेदारी इस परियोजना का अहम हिस्सा है।
परियोजना में भारत में निर्माण के साथ तकनीक हस्तांतरण और घरेलू पनडुब्बी निर्माण क्षमता को मजबूत करने पर जोर है। प्रस्तावित पनडुब्बियों में वायु-स्वतंत्र प्रणोदन यानी एआईपी जैसी क्षमता भी परियोजना की मूल आवश्यकताओं का हिस्सा रही है। पनडुब्बी साझेदारी ऐसे समय में सामने आई है जब भारत और जर्मनी के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग को विस्तार देने पर जोर बढ़ा है। अगस्त में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की जर्मनी यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप और संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना प्रशिक्षण में सहयोग से जुड़ी कार्यान्वयन व्यवस्था पर हस्ताक्षर किए थे। इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संयुक्त प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और रक्षा क्षेत्र में सहयोग के अवसरों को बढ़ाना है।