Monday, 28 Sep 2026

भारत-नेपाल सीमा पर बालेन्द्र शाह के बयान पर बवाल

काठमांडू (31 मई 26)। भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को लेकर नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह का एक बयान विवादों में आ गया है। संसद में सीमा विवाद पर सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि केवल भारत ने ही नेपाली क्षेत्रों पर अतिक्रमण नहीं किया है, बल्कि नेपाल ने भी कुछ स्थानों पर भारतीय भूमि का अतिक्रमण किया है। प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें इस तथ्य की जानकारी मिली। उन्होंने सांसदों से कहा कि दोनों देशों को भावनाओं के बजाय तथ्यों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर इस मुद्दे का समाधान निकालना चाहिए। 

शाह ने बताया कि नेपाल सरकार ने भारत को एक औपचारिक राजनयिक नोट भेजकर Lipulekh Pass समेत विभिन्न क्षेत्रों पर कथित अतिक्रमण का मुद्दा उठाया था और भारत की ओर से जवाब भी प्राप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि दोनों देश इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और सीमा विशेषज्ञों की मदद से बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों के जरिए समाधान खोजने पर सहमत हैं। भारत और नेपाल के बीच मुख्य सीमा विवाद Kalapani, Lipulekh Pass और Limpiyadhura क्षेत्रों को लेकर है। नेपाल इन क्षेत्रों पर दावा करता है, जबकि भारत इन्हें Uttarakhand का हिस्सा मानता है। भारत में नेपाल के पूर्व राजदूत नीलांबर आचार्य ने कहा कि उनके पास नेपाल द्वारा भारतीय भूमि पर अतिक्रमण किए जाने का कोई तथ्यात्मक रिकॉर्ड नहीं है। उन्होंने बताया कि भारत-नेपाल सीमा के लगभग 97 प्रतिशत हिस्से से जुड़े विवाद पहले ही सुलझाए जा चुके हैं। भारत में नेपाल के एक अन्य पूर्व राजदूत दीप कुमार उपाध्याय ने भी कहा कि नेपाल द्वारा भारतीय क्षेत्र पर अतिक्रमण का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री ने इतने गंभीर विषय पर किस आधार पर यह टिप्पणी की। वहीं प्रसिद्ध भूगोलवेत्ता और सीमा विशेषज्ञ बुद्धी नारायण श्रेष्ठा ने भी प्रधानमंत्री के बयान को खारिज करते हुए कहा कि नेपाल ने कभी भी भारतीय क्षेत्रों पर कब्जा नहीं किया है। उन्होंने माना कि कुछ सीमावर्ती इलाकों में किसान एक-दूसरे की जमीन का उपयोग करते रहे हैं, लेकिन इसे सरकारी स्तर का अतिक्रमण नहीं कहा जा सकता।

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