नईदिल्ली (22 मई 25)। भारत सरकार ने बुधवार को पाकिस्तान उच्चायोग में तैनात एक पाकिस्तानी अधिकारी को देश से निष्कासित कर दिया। उसे 'अवांछित व्यक्ति' घोषित किया गया, क्योंकि वह अपनी राजनयिक भूमिका से बाहर जाकर ऐसी गतिविधियों में शामिल था जो नियमों के खिलाफ थी।
सरकार ने उस अधिकारी को 24 घंटे के भीतर भारत छोड़ने का आदेश दिया है। साथ ही, पाकिस्तान उच्चायोग के प्रभारी को एक आधिकारिक आपत्ति पत्र भी सौंपा गया है। इस पत्र में साफ कहा गया कि पाकिस्तान के किसी भी अधिकारी को भारत में अपने विशेषाधिकारों या पद का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। जब किसी देश को लगता है कि कोई विदेशी राजनयिक उसके देश के नियमों का पालन नहीं कर रहा या गड़बड़ी कर रहा है, तो उसे 'अवांछित व्यक्ति' घोषित किया जाता है। इसका मतलब होता है कि अब उस अधिकारी का उस देश में रहना स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह कूटनीति में विरोध जताने का सबसे सख्त तरीका माना जाता है। इसमें आमतौर पर कारण सार्वजनिक नहीं किए जाते।
इस कार्रवाई का समय भी खास है, क्योंकि कुछ दिन पहले ही भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी दी थी। यह ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया आतंकवाद विरोधी अभियान है। एक वरिष्ठ भारतीय सैन्य अधिकारी ने लगभग 70 देशों के प्रतिनिधियों को इस ऑपरेशन की जानकारी दी थी। इसके तुरंत बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के अधिकारी को निष्कासित करने का फैसला लिया। विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि, 'पाकिस्तान उच्चायोग के प्रभारी को साफ तौर पर बता दिया गया है कि भारत में तैनात कोई भी पाकिस्तानी अधिकारी अपनी राजनयिक स्थिति का गलत इस्तेमाल न करे।'