काठमांडू (27 जुलाई 26)। भारत और नेपाल के बीच सीमा पार यात्रा को और आसान बनाने की दिशा में नेपाल ने बड़ा कदम उठाया है। काठमांडू ने नई दिल्ली से अनुरोध किया है कि उसके बायोमेट्रिक नेशनल आइडेंटिटी कार्ड को पासपोर्ट और नागरिकता प्रमाणपत्र की तरह आधिकारिक यात्रा दस्तावेज़ के रूप में मान्यता दी जाए। इस प्रस्ताव पर अब भारत के जवाब का इंतजार है। नेपाल के आव्रजन विभाग ने बताया कि यह प्रस्ताव विदेश मंत्रालय के माध्यम से भारत सरकार को भेजा जा चुका है। अब नई दिल्ली की औपचारिक मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। आव्रजन विभाग के महानिदेशक राम चंद्र तिवारी ने कहा कि यदि भारत इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है तो दोनों देशों के बीच हवाई और सड़क मार्ग से यात्रा पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगी।
वर्तमान नियमों के अनुसार नेपाली नागरिकों को भारत आने के लिए वैध पासपोर्ट या मूल नागरिकता प्रमाणपत्र दिखाना पड़ता है, विशेषकर हवाई यात्रा के दौरान। भारतीय नागरिकों को नेपाल प्रवेश के लिए पासपोर्ट या फोटोयुक्त मूल मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) प्रस्तुत करना होता है। यदि भारत NID कार्ड को मान्यता देता है, तो नेपालियों के लिए यात्रा के विकल्प बढ़ जाएंगे। नेपाल का नेशनल आइडेंटिटी (NID) कार्ड आधुनिक बायोमेट्रिक तकनीक पर आधारित है। इसमें फिंगरप्रिंट चेहरे की डिजिटल पहचान आईरिस (आंखों की पुतली) की स्कैनिंग जैसी उन्नत सुरक्षा सुविधाएं शामिल हैं। नेपाल सरकार भविष्य में नागरिकता प्रमाणपत्र की जगह इसी एक कार्ड को सार्वभौमिक पहचान पत्र बनाना चाहती है। नेपाल में अब तक लगभग 45 लाख लोगों को NID कार्ड जारी किया जा चुका है, जबकि करीब 2 करोड़ अतिरिक्त आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। सरकार बैंकिंग, पासपोर्ट, भूमि पंजीकरण और अन्य सरकारी सेवाओं में भी इसी कार्ड को अनिवार्य बनाने की दिशा में काम कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में भारत के दूतावास के अधिकारियों ने नेपाल के आव्रजन विभाग के साथ इस विषय पर बैठक की। अधिकारियों के मुताबिक भारतीय पक्ष ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाया है, हालांकि अंतिम निर्णय नई दिल्ली स्तर पर लिया जाएगा।