Thursday, 01 Oct 2026

भारत-यूएस व्यापार डील सबसे बड़ी जीत: कुगेलेमन

नईदिल्ली (03 फरवरी 26)। अमेरिका और भारत के बीच हाल ही में घोषित व्यापार समझौते को दक्षिण एशिया विशेषज्ञ माइकल कुगेलेमन ने दोनों देशों के रिश्तों में 'लगभग एक साल में सबसे बड़ी जीत' करार दिया है। यह समझौता ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच रिश्ते कुछ महीनों से तनावपूर्ण रहे थे। कुगेलेमन ने  कहा कि यह समझौता 'विश्वास बहाली' का बड़ा कदम है। उन्होंने याद दिलाया कि लगभग एक साल पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को व्हाइट हाउस में बुलाया था और दोनों नेताओं ने व्यापार समझौते पर चर्चा करने का वादा किया था। इसके बाद कई दौर की वार्ता के बावजूद समझौता संभव नहीं दिख रहा था, लेकिन अब यह संभव हुआ है।

विशेषज्ञ ने कहा कि इस समझौते से अन्य विवादित मुद्दों को भी सुलझाने की गति बढ़ सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि समझौते के कई अहम पहलू अभी स्पष्ट नहीं हैं, खासकर ऊर्जा आयात और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दे। उन्होंने कहा कि यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि भारत रूस से तेल की खरीद पूरी तरह बंद कर देगा या नहीं, क्योंकि हाल के महीनों में भारत ने रूस से तेल आयात घटाया है, लेकिन पूरी तरह बंद नहीं किया है। कुगेलेमन ने यह भी कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि भारत ने कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अमेरिकी कंपनियों को बाजार खोलने पर सहमति दी है या नहीं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अमेरिका द्वारा रूस से तेल आयात पर लगाए गए अतिरिक्त 25% टैरिफ का क्या होगा क्या इसे पूरी तरह हटाया जाएगा या केवल 18% तक घटाया जाएगा। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि अमेरिका और भारत ने व्यापार समझौता किया है, जिसमें अमेरिकी टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने रूस से तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका से अधिक खरीद करने पर सहमति जताई है। ट्रम्प ने कहा कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को भी घटाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस समझौते की पुष्टि करते हुए कहा कि 'Made in India' उत्पादों पर टैरिफ 18% होगा। उन्होंने ट्रम्प को धन्यवाद दिया और कहा कि दोनों बड़े लोकतंत्रों के सहयोग से लोगों को लाभ मिलेगा। इसके बाद व्हाइट हाउस ने ANI को बताया कि अमेरिका भारत पर रूस से तेल खरीदने पर लगाए गए अतिरिक्त 25% टैरिफ को भी हटा देगा, लेकिन इसके बदले भारत को रूस से तेल खरीद 'घटाने' नहीं बल्कि 'बंद' करनी होगी।

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