नागपुर (25 अप्रैल 26)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि भारत निश्चित रूप से विश्वगुरु बनेगा और देश के भविष्य के बारे में किसी को भी कोई संदेह नहीं रखना चाहिए। भागवत ने कहा, 'पहले लोगों को संदेह था कि राम मंदिर कभी बनेगा भी या नहीं, लेकिन उसका निर्माण हुआ। इसी तरह, भारत का विश्वगुरु बनना भी तय है।' आरएसएस प्रमुख ने नागपुर शहर के बाहरी इलाके जामथा में राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (एनसीआई) के परिसर में 'भारत दुर्गा शक्ति स्थल' के भूमि पूजन के बाद यह बात कही।
भागवत ने कहा कि भारत के विश्वगुरु बनने का सपना निरंतर प्रयासों और सामूहिक अनुशासन के माध्यम से साकार होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि इस तरह का परिवर्तन वर्तमान पीढ़ी में देखा जा सकता है। संघ प्रमुख ने कहा कि भारत के भविष्य को लेकर किसी भी तरह का संदेह मन से निकाल देना चाहिए। उन्होंने कहा, 'भारत के भविष्य पर संदेह न करें। साहस और आत्मनिर्भरता के साथ जिएं तथा इन मूल्यों को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं। भारत मजबूत बनेगा और दुनिया का मार्गदर्शन करेगा।' भागवत ने राम मंदिर आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा, 'लोगों को संदेह था कि राम मंदिर बनेगा या नहीं, लेकिन यह बना। इसी तरह, भारत का विश्वगुरु बनना तय है। इस बात को लेकर कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि कोई चीज होगी या नहीं होगी। जो होना तय है, वह होकर रहेगा।'उन्होंने कहा, 'यदि हम अपने संकल्प के अनुसार कदम दर कदम कार्य करते रहें, तो भारत मजबूत, सदाचारी और वैश्विक मार्गदर्शक बनेगा।' 'भागवत ने कहा कि भारत को सही मायने में समझने के लिए लोगों को पहले भारत में गहराई से झांकना होगा। उन्होंने कहा, 'भारत माता की पूजा करने के लिए हमें खुद भारत बनना होगा।' भागवत ने कहा कि देश को उसके सभ्यतागत मूल्यों के आधार पर समझा जाना चाहिए, न कि 150 वर्षों में विकसित औपनिवेशिक या पश्चिमी दृष्टिकोण से। उन्होंने नागरिकों से 'पश्चिमी सोच को त्यागने' और विचार एवं आचरण के मामले में भारतीय परंपराओं से फिर से जुड़ने का आग्रह किया।