नई दिल्ली (31 जुलाई 26)। मध्यप्रदेश के धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार की नमाज के लिए भोजशाला से सटी वैकल्पिक जमीन तय कर दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समाज प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक इस स्थान पर नमाज अदा कर सकेगा। अदालत ने राज्य सरकार को यहां आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त को निर्धारित की गई है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने नक्शे में दर्शाई गई 'यलो साइट' को नमाज के लिए उपयुक्त माना। कोर्ट ने कहा कि इस भूखंड तक पहुंचने के लिए अलग और स्वतंत्र रास्ता उपलब्ध है तथा यह विवादित भोजशाला परिसर के निकट स्थित है। मुस्लिम पक्ष ने भी इस स्थान पर सहमति जताई, जिसके बाद अदालत ने इसे अंतिम रूप दे दिया। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के पालन में जिला प्रशासन ने भोजशाला से करीब दो किलोमीटर दूर नमाज के लिए एक स्थान निर्धारित किया था। मुस्लिम पक्ष ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह स्थान अदालत के आदेश की भावना के अनुरूप नहीं है। पक्षकारों का कहना था कि गूगल मैप के अनुसार यह जगह सड़क मार्ग से करीब 1.3 किलोमीटर और सीधी दूरी से लगभग 900 मीटर दूर है, इसलिए इसे भोजशाला के निकट वैकल्पिक स्थान नहीं माना जा सकता। मुस्लिम पक्ष ने सुनवाई के दौरान नक्शा प्रस्तुत कर चार वैकल्पिक स्थानों का सुझाव दिया। इनमें अधिकांश भूमि दरगाह या वक्फ से संबंधित थी और संबंधित मुतवल्ली ने भी उनके उपयोग पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला परिसर के पीछे लकड़ी पीठा के पास स्थित सर्वे नंबर 596 की जमीन को नमाज के लिए उपयुक्त माना। यह स्थान परिसर के पीछे दाहिनी ओर स्थित वैकल्पिक निकास मार्ग के सामने है। अदालत ने स्पष्ट किया कि शुक्रवार की नमाज केवल इसी स्थान पर अदा की जाएगी। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि केवल कानून-व्यवस्था की आशंका के आधार पर किसी समुदाय के धार्मिक अधिकारों पर रोक नहीं लगाई जा सकती। कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार का संवैधानिक दायित्व है। अदालत ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह शांतिपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने कोई नया आदेश पारित नहीं किया है। अदालत ने केवल अपने पूर्व अंतरिम आदेश को स्पष्ट करते हुए उस वैकल्पिक स्थान का निर्धारण किया है, जहां नमाज अदा की जाएगी। साथ ही कहा कि यदि भविष्य में दोनों पक्ष आपसी सहमति से कोई अन्य उपयुक्त स्थान तय कर लेते हैं तो उस पर भी कोई रोक नहीं होगी।