इंदौर (27 मई 26)। भोजशाला प्रकरण को लेकर कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। भोजशाला मामले में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को चुनौती देते हुए मुस्लिम पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की गई है।
मुस्लिम पक्ष की संस्था मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी ने 25 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी प्रस्तुत की है। इससे पहले 21 मई 2026 को काजी मोइनुद्दीन की ओर से भी एक एसएलपी दायर की जा चुकी है, जिस पर अभी सुनवाई नहीं हुई है। भोजशाला प्रकरण में हाई कोर्ट के फैसले के बाद दोनों पक्षों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। एक ओर मुस्लिम पक्ष फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रहा है, वहीं दूसरी ओर हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस इसे हिंदू समाज की ऐतिहासिक विजय बताते हुए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है। इसी क्रम में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री का 27 मई से 30 मई तक इंदौर और धार प्रवास प्रस्तावित है।
भोजशाला में पूजन और विभिन्न कार्यक्रमों में लेंगी भाग- हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के पदाधिकारियों के अनुसार रंजना अग्निहोत्री भोजशाला में दर्शन-पूजन के साथ विभिन्न धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होंगी। बताया गया है कि वे लखनऊ के प्रसिद्ध महादेव मंदिर के तालाब से 108 कमल पुष्प लेकर आ रही हैं, जिन्हें मां वाग्देवी के चरणों में अर्पित किया जाएगा। संस्था के प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष गोयल ने बताया कि भोजशाला प्रकरण में मई 2022 में हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में दायर याचिका में रंजना अग्निहोत्री, आशीष जनक, आशीष गोयल, सुनील सारस्वत और मोहित गर्ग याचिकाकर्ता हैं। रंजना अग्निहोत्री 2024 में हुए भोजशाला सर्वेक्षण में भी शामिल रही थीं। उल्लेखनीय है कि रंजना अग्निहोत्री पूर्व में श्री राम जन्मभूमि, काशी विश्वनाथ मंदिर और श्री कृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामलों में भी कानूनी लड़ाई लड़ चुकी हैं।
98 दिन तक चला था एएसआई का सर्वे
आशीष गोयल के अनुसार, 5 फरवरी 2024 को इसी याचिका में भोजशाला के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की मांग की गई थी। इसके बाद हाई कोर्ट ने 11 मार्च 2024 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को वैज्ञानिक सर्वे का आदेश दिया था। 22 मार्च 2024 से 27 जून 2024 तक कुल 98 दिन तक सर्वेक्षण चला। बताया जा रहा है कि यह सर्वेक्षण भी बाद में आए फैसले का एक महत्वपूर्ण आधार बना। प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने 22 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी के अवसर पर शुक्रवार के दिन अबाधित पूजा की अनुमति देने का आदेश दिया था। इसके बाद मामला पुन: हाई कोर्ट पहुंचा, जहां विस्तृत सुनवाई के बाद हिंदू पक्ष के समर्थन में निर्णय आया।