Monday, 28 Sep 2026

भोजशाला में प्रतिमाओं की पुनर्स्थापना, मुफ्त दर्शन की मांग

इंदौर (04 जून 26)। धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर एक बार फिर विवाद और मांगों का दौर तेज हो गया है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस संगठन ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) भोपाल मंडल को अलग-अलग ज्ञापन सौंपकर भोजशाला परिसर में मिली देवी-देवताओं की प्रतिमाओं और धार्मिक अवशेषों को पुन: स्थापित करने, श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त प्रवेश और दर्शन-पूजन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

संगठन की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री के मार्गदर्शन में जिला अध्यक्ष आशीष गोयल ने एएसआई अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे। ज्ञापन में हाई कोर्ट के आदेशों के पालन और भोजशाला परिसर को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश (एसओपी) जारी करने की मांग की गई है। 19 मई 2026 को दिए गए ज्ञापन में संगठन ने कहा कि भोजशाला परिसर में एएसआई द्वारा किए गए सर्वेक्षण और उत्खनन कार्य के दौरान देवी-देवताओं की प्रतिमाएं, स्थापत्य अवशेष और हिंदू धार्मिक महत्व की सामग्री प्राप्त हुई है। संगठन का दावा है कि ये अवशेष इस बात के प्रमाण हैं कि भोजशाला प्राचीन काल से हिंदू आस्था और मां वाग्देवी/मां सरस्वती की आराधना का प्रमुख केंद्र रही है। ज्ञापन में मांग की गई कि सर्वेक्षण के दौरान प्राप्त सभी प्रतिमाओं और धार्मिक अवशेषों को, जिन्हें वर्तमान में धार संग्रहालय और अन्य स्थानों पर सुरक्षित रखा गया है, पुन: भोजशाला परिसर में स्थापित किया जाए ताकि श्रद्धालु दर्शन और पूजन कर सकें।

श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त प्रवेश और पूजा की मांग

20 मई 2026 को दिए गए दूसरे ज्ञापन में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने हाई कोर्ट में दायर रिट याचिका का हवाला देते हुए कहा कि न्यायालय के आदेशों का अक्षरश: पालन कराया जाए। संगठन ने दावा किया कि वर्तमान में श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों से एक रुपये का टिकट लिया जा रहा है, जो न्यायालय के आदेशों की भावना के विपरीत है। संगठन ने श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क प्रवेश और पूजा-अर्चना का अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की। ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि भोजशाला के अंदर दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित बंद कमरे को खोला जाए, जिसे संगठन ने मूल मंदिर का हिस्सा बताया है। इसके साथ ही एएसआई द्वारा 2024 में किए गए सर्वेक्षण के दौरान परिसर से बाहर संरक्षित रखे गए सभी अवशेष, देवी-देवताओं की प्रतिमाएं और हिंदू प्रतीक चिह्नों को वापस भोजशाला परिसर में स्थापित करने की मांग की गई है। संगठन ने कहा कि परिसर के बाहर रखे गए कई अवशेषों पर हिंदू धर्म से जुड़े प्रतीक और प्रतिमाएं मौजूद हैं, इसलिए उन्हें सम्मानपूर्वक भोजशाला के भीतर विराजित किया जाना चाहिए।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि हाई कोर्ट द्वारा भोजशाला को मंदिर घोषित किए जाने के बाद परिसर में निर्माण के बाद लगाए गए मुस्लिम धर्म से जुड़े प्रतीक चिह्नों को तत्काल हटाया जाए। संगठन ने एएसआई से इस संबंध में शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने आरोप लगाया कि हाई कोर्ट के आदेश और एएसआई के निदेर्शों के बावजूद अब तक कई बिंदुओं पर स्पष्टता नहीं है। ज्ञापन में कहा गया कि भोजशाला के बाहर लगे नाम और दिशा-निर्देश स्पष्ट नहीं किए गए हैं, परिसर के अंदर बंद कमरा अब तक नहीं खोला गया और सर्वेक्षण में प्राप्त प्रतिमाओं को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने एएसआई से मांग की है कि भोजशाला परिसर में दर्शन, पूजन, अवशेषों की पुनर्स्थापना और धार्मिक व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत एसओपी जारी की जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

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