छतरपुर (22 नवंबर 24)। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 21 अक्टूबर से अपनी सनातनी एकता पदयात्रा शुरू की है। यह यात्रा बागेश्वर धाम से शुरू होकर ओरछा तक जाएगी, जो कुल 160 किलोमीटर लंबी है। शास्त्री जी का कहना है कि इस यात्रा का उद्देश्य हिंदुओं को एकजुट करना और उनके खिलाफ होने वाले अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाना है। यात्रा के दौरान वह हिंदू समाज में भेदभाव और जातिवाद को समाप्त करने का संदेश देंगे। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी पदयात्रा के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा, 'सनातनी एकता पदयात्रा' का मुख्य लक्ष्य हिंदू समाज में एकता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि यदि आरती के बाद राष्ट्रगीत का गायन मंदिरों में किया जाए, तो यह एक अच्छी पहल होगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन देशभक्त है और कौन नहीं। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि मस्जिदों में भी राष्ट्रगीत का गायन होना चाहिए ताकि यह संदेश पूरे देश में एकता का हो। धीरेंद्र शास्त्री ने धर्मांतरण के मुद्दे पर भी महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण एक गंभीर समस्या बन चुका है, और इसके पीछे एक बड़ा कारण यह है कि हम उन तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाते। वह मानते हैं कि धर्मांतरण को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है, हिंदू समाज को उन लोगों के पास जाकर उत्सव और कथा के माध्यम से जोड़ना। धार्मिक नेताओं को उन क्षेत्रों में जाना होगा जहां लोग धर्म परिवर्तन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनेता वोट बैंक की राजनीति के लिए इन लोगों के पास जाते हैं, लेकिन धार्मिक नेता अपने धर्म को बचाने के लिए उनके पास नहीं जाते।