इंफाल (04 सितंबर 25)। मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय संघर्ष और अस्थिरता के बीच केंद्र सरकार और मणिपुर सरकार ने गुरुवार को कुकी-ज़ो समूहों के साथ एक अहम त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य राज्य की क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखना और शांति प्रक्रिया को नई दिशा देना है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सितंबर के दूसरे सप्ताह में मणिपुर का दौरा कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो मई 2023 में हुई हिंसा के बाद यह उनकी पहली यात्रा होगी।
इस समझौते की प्रमुख शर्तों में राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (NH-2) को फिर से खोलना शामिल है, जिससे यात्रियों और आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही बिना किसी बाधा के संभव हो सकेगी। कुकी-ज़ो परिषद ने भरोसा दिया है कि वे सुरक्षा बलों के साथ मिलकर इस रूट पर शांति बनाए रखेंगे। गृह मंत्रालय और कुकी समूहों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद यह सहमति बनी है। गौरतलब है कि मणिपुर में मई 2023 में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच भयंकर जातीय हिंसा भड़क उठी थी। यह संघर्ष उस समय शुरू हुआ, जब मणिपुर हाईकोर्ट ने तत्कालीन बीरेन सिंह सरकार को मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने पर विचार करने को कहा। इस हिंसा में अब तक लगभग 260 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें दोनों समुदायों के लोग और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। हालांकि हाल के महीनों में हालात कुछ हद तक शांत हुए हैं। आज हुए इस समझौते के तहत त्रिपक्षीय ऑपरेशन सस्पेंशन समझौते में नए संशोधन किए गए हैं, जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं और अगले एक वर्ष तक प्रभावी रहेंगे। इनमें खास जोर मणिपुर की भौगोलिक एकता बनाए रखने पर है।