इंदौर (21 अप्रैल 25)। लोग कहते हैं शहर की तासीर बदल रही है। शाम होते ही युवा रेस्त्रां, बार और पब की ओर रुख कर रहें हैं। मेट्रो सिटीज की विसंगतियां शहर के युवाओं को अपने आगोश में ले रही है। इन सब चिंताओं के बीच कुछ तस्वीरें मन को सुकून देती हैं। ऐसा ही नज़ारा था स्कीम नंबर 78 विजयनगर के एक रेस्त्रां का, जहां अन्य ग्राहकों के साथ 20-25 युवाओं का समूह कुछ रचनात्मक करने की जुगत में था।
कुछ देर ऑब्जर्व करने के बाद नज़दीक जाकर देखा तो पाया कि इनमें से कुछ कालेज गोइंग छात्र हैं, जिन्होंने 'अनहोप्ड रीडर्स' नामक एक समूह बना रखा है। युवा विद्यार्थियों का यह समूह फन रीडर्स को एक-दूसरे से मिलने के साथ रचनात्मक कार्य करने और सीखने का मौका दे रहा है। इस समूह की अगुआई करने वाले काव्य और प्रियांशी के अनुसार वे लोगों को बुकमार्क बनाने और सीखने का अवसर दे रहे हैं। आमतौर पर उनका समूह रविवार को किसी गार्डन, पुरातात्विक स्थल आदि पर ऐसे पाठकों को एकत्र करता है, जो अपनी रूचि की किताबें और साहित्य पढ़ने के साथ उस पर विचार-मंथन भी करे। इसके लिए ये युवा खुद काफी किताबें अपने पास से या किसी लायब्रेरी से ले जाते हैं और कई पाठक स्वयं भी अपनी पुस्तकें लेकर आते हैं। आज के दौर में निश्चित ही यह काफी सुकून भरा है कि ये युवा अपनी ऊर्जा रचनात्मक कार्यों में खफा रहें हैं।
खैर, आज ये युवा इस रेस्त्रां में लोगों को रचनात्मक बुकमार्क बनाना सीखा रहे थे और अपने से अधिक उम्र के साथियों से सीख भी रहे थे। इस अनूठे आयोजन में एक दस वर्षीय बालक अभिराज भी शामिल था, जिसने उत्साह पूर्वक बुकमार्क बनाना सीखा। बुकमार्क बनाना भले ही बड़ा कार्य न हो, लेकिन इसके पीछे छिपा रचनात्मक भाव सराहनीय है। यह उस उम्मीद को भी कायम रखता है, जो कहीं दरकती सी नज़र आ रही थी। यह उम्मीद और परवान चढ़े यही कामना।