भोपाल (15 सितंबर 26)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश की विद्युत क्षमता का 30 प्रतिशत क्लीन एनर्जी का है। मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा का भी सेंटर बन रहा है। विद्युत कंपनियों में वर्षों से लंबित पदोन्नति का रास्ता साफ करते हुए 9 हजार से अधिक अभियंताओं और कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई है। इससे हमारे कर्मचारियों में नया उत्साह और आगे बढ़ने का विश्वास पैदा हुआ है। विद्युत कंपनियों में लगभग 20 वर्षों से लंबित फ्रिज बेनिफिट का भी समाधान किंया गया है। इसमें नाइट शिफ्ट अलाउंस, कन्वेंस अलाउंस, कंपनसेटरी अलाउंस सहित विभिन्न भत्तों को रिवाइज किया गया। इस निर्णय का लाभ लगभग 25 हजार अधिकारियों और कर्मचारियों को मिल रहा है। विद्युत कंपनियों के अभियंताओं की तीन वेतन विसंगतियों का भी समाधान किया गया है। लंबे समय से चली आ रही इस समस्या के समाधान से हमारे अभियंताओं को राहत मिली है। अधिकारी-कर्मचारियों के परिवार का स्वास्थ्य हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी दिशा में अभियंताओं और कर्मचारियों के लिए कैशलेस मेडिक्लेम बीमा योजना लागू की गई है। साथ ही, मध्यप्रदेश की विद्युत कंपनियों में कंपनी कैडर के अभियंताओं, अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सोलर रूफटॉप योजना भी लागू की है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ऊर्जा विभाग के अभियंता और कर्मचारियों द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने समारोह का रविंद्र भवन में दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध पावर इंजिनियर्स एंड एम्पलाइज एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा कर्मचारी और अभियंताओं के हित में लिए गए निर्णयों के लिए उनका अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियंता दिवस की शुभकामनाएं दीं। डॉ. यादव ने कहा कि बिजली विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के प्रयासों से ही मध्यप्रदेश बिजली गुल से बिजली फुल स्टेट बना है। हमारा मध्यप्रदेश बिजली सरप्लस स्टेट है, प्रदेश के पास 29 हजार मेगावाट की विशाल विद्युत क्षमता मौजूद है। मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा का भी सेंटर बन रहा है। प्रदेश की विद्युत क्षमता में 30% हिस्सा क्लीन एनर्जी का है। दुबई में इन्वेस्ट एमपी कार्यक्रम में 53 हज़ार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले है, सबसे अधिक निवेश सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में मिला है। प्रदेश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को देखते हुए सतपुड़ा ताप विद्युत गृह और अमरकंटक ताप विद्युत गृह नई विद्युत उत्पादन इकाई को मंजूरी दी गई है। बारह वर्षों में राज्य की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता 25 गुना से अधिक बढ़ी है। आज मध्यप्रदेश 11 हजार मेगावॉट से अधिक की क्षमता स्थापित कर चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में बिजली उत्पादन के लिए हर क्षेत्र में निवेश आ रहा है। प्रदेश में डेटा सेंटर और एआई सेंटर की स्थापना के बाद यह खपत और बढ़ेगी, लेकिन हमारा ऊर्जा विभाग पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ रहा है।