लंदन (22 मई 24)। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने सरकार को सौंपी गई एक जांच रिपोर्ट में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) पर देश में 1970 के दशक में मरीजों को संक्रमित खून चढ़ाने के प्रकरण को दबाने का आरोप लगाए जाने के बाद माफी मांगी। जांच समिति के अध्यक्ष सर ब्रायन लैंगस्टाफ द्वारा इस मुद्दे पर अपना कड़ा फैसला सुनाए जाने के कुछ घंटों बाद संसद के निचले सदन ‘हाउस ऑफ कॉमन्स' में सुनक ने कहा कि जांच में उल्लिखित ‘विफलताओं और इनकार के रवैये' के बाद यह ब्रिटेन के लिए शर्म का दिन है। ब्रिटेन में संक्रमित रक्त प्रकरण की जांच में सोमवार को पाया गया कि अधिकारियों और लोक स्वास्थ्य सेवा ने जानकारी रहने के बावजूद हजारों मरीजों को संदूषित रक्त के जरिये जानलेवा संक्रमण कराया।
माना जाता है कि ब्रिटेन में, 1970 के दशक से लेकर 1990 के दशक के शुरुआती वर्षों तक एचआईवी या हेपटाइटिस से संक्रमित रक्त आधान करने से करीब 3,000 लोगों की मौत हुई। इस प्रकरण को 1948 से ब्रिटेन की सरकार संचालित राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के इतिहास में सबसे घातक आपदा माना जाता है। सुनक ने पीड़ितों और उनके परिवारों को संबोधित करते हुए कहा, ‘मुझे यह समझना लगभग असंभव लगता है कि यह कैसा महसूस हुआ होगा... मैं दिल से और स्पष्ट रूप से माफी मांगना चाहता हूं।' प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मौजूदा और 1970 के दशक की हर सरकार की ओर से, मुझे वास्तव में खेद है।' उन्होंने सभी पीड़ितों को मुआवजा देने की पुष्टि की। पूर्व न्यायाधीश लैंगस्टाफ ने आपदा को टालने में नाकाम रहने के लिए तत्कालीन सरकारों और चिकित्सा पेशेवरों की आलोचना की है।