उज्जैन (19 जुलाई 26)। महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने दान में मिलने वाले सोने-चांदी के आभूषणों की जांच को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब मंदिर में आने वाले बहुमूल्य आभूषणों की शुद्धता जांचने के लिए अत्याधुनिक कैरेट मीटर अर्थात एक्स-रे फ्लोरेसेंस स्पेक्ट्रोमीटर का उपयोग किया जाएगा। इस मशीन से दान में मिले सोने-चांदी की गुणवत्ता और कैरेट का पता कुछ ही मिनटों में लगाया जा सकेगा।
महाकाल मंदिर की उप प्रशासक सिम्मी यादव ने बताया कि मंदिर प्रबंध समिति ने सीएसआर फंड के माध्यम से करीब 15 लाख की लागत से यह अत्याधुनिक कैरेट मीटर मशीन महाराष्ट्र से मंगवाई है। मशीन मंदिर परिसर में पहुंच चुकी है और आवश्यक तैयारियां पूरी होने के बाद सोमवार से इसका संचालन शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस पहल के साथ महाकाल मंदिर देश के उन चुनिंदा मंदिरों में शामिल हो जाएगा, जहां दान में मिलने वाले बहुमूल्य आभूषणों के परीक्षण के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
अब तक दान में प्राप्त सोने-चांदी के आभूषणों की तीन रसीदें बनाई जाती थीं। एक रसीद के साथ आभूषणों को मंदिर के कोठार में सुरक्षित रखा जाता था। इसके बाद मंदिर की अधिकृत तीन सदस्यीय सुनार समिति आभूषणों की जांच करती थी और वही यह तय करती थी कि दान में प्राप्त धातु शुद्ध सोना या चांदी है या नहीं। पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारियों की मौजूदगी में होती थी।
महाकालेश्वर मंदिर में पिछले तीन सालों (2023 से 2025) में 20.92 करोड़ श्रद्धालु आए। इससे मंदिर प्रबंध समिति को कुल 356.17 करोड़ रुपए की आय हुई। इनमें बतौर दान 175.70 करोड़ मिले, जबकि लड्डू प्रसाद की बिक्री से 180.77 करोड़ की आय हुई। गत वर्ष पहली बार गुप्त दान में 4.65 करोड़ रुपए भी प्राप्त हुए हैं। अब मंदिर के खजाने में 472 करोड़ रुपए हैं।महाकाल लोक का लोकार्पण 11 अक्टूबर 2022 को होने के बाद प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढकर 1.5 से 2 लाख हो गई है। मंदिर प्रबंध समिति के अनुसार महाशिवरात्रि, सावन-भादौ माह, नाग पंचमी पर यह संख्या 5-8 लाख तक पहुंच जाती है।