भोपाल (02 मार्च 25)। लेखन समाज का दर्पण होता है। जब एक लेखिका अपनी रचनाओं के माध्यम से महिलाओं की स्थिति, उनके अधिकारों, उनके संघर्षों और उनके उत्थान की बात करती है, तो वह केवल अपनी ही कहानी नहीं बयां करती, बल्कि वह उन सभी महिलाओं की बात करती है जो मौन हैं, जो संघर्ष कर रही हैं और जो बदलाव की प्रतीक्षा कर रही हैं। यह बात महिला बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहीं। वे हिंदी भवन के सभागार में हिंदी लेखिका संघ मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित 30 वां वार्षिक कृति पुरस्कार एवं सम्मान समारोह 2024-25 में संबोधित कर रही थी।
भूरिया ने कहा कि लेखन समाज के हर वर्ग को संदेश देता है। महिला लेखिकाओं का योगदान अमूल्य है और हम सभी को इसे पहचानने और प्रोत्साहित करने की जरूरत है।उन्होने कहा कि हिन्दी साहित्य का इतिहास समृद्ध और विविधताओं से भरा हुआ है, जिसमें नारी का योगदान एक अहम् और विशिष्ट स्थान रखता है। हमारे देश के साहित्य में अनेक महान लेखिकाओं का योगदान रहा है, जिन्होंने न केवल समाज में विद्यमान सामाजिक कुरीतियों और भेदभाव को उजागर किया, बल्कि उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से नारी के अधिकारों की लड़ाई भी लड़ी। यही कारण है कि हमें यह समझने की जरूरत है कि महिला लेखिकाओं ने केवल साहित्य में ही नहीं, बल्कि समाज में भी एक नई दिशा का संचार किया है।
मंत्री भूरिया ने कहा कि प्रारंभ में महिला लेखकों को पुरुष लेखकों के मुकाबले कम मान्यता मिलती थी। लेकिन समय के साथ हमारे समाज और साहित्य में बदलाव आया है। आज ऐसी अनेक महिला लेखिकाएं हैं, जिन्होंने अपने लेखन से साहित्यिक जगत को एक नया आयाम दिया है। महिला लेखिकाओं ने हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज की है। चाहे वह कहानी हो, कविता हो, उपन्यास हो या निबंध हो, हर रूप में उनकी आवाज़ सुनाई दी है।