नईदिल्ली 22 मार्च 26)। भारत ने मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के दौरान एक संतुलित और रणनीतिक रुख अपनाया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 28 फरवरी से अब तक सभी प्रमुख देशों से संपर्क बनाए रखा है, लेकिन किसी भी पक्ष का खुलकर समर्थन नहीं किया। भारत ने किसी एक पक्ष का समर्थन करने से बचते हुए संतुलन बनाए रखा है।
भारत की स्पष्ट नीति- किसी दबाव में आकर पक्ष नहीं लेना। अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देना। कूटनीति और संतुलन बनाए रखना। इजराइल और ईरान दोनों से संबंध। भारत के इसराइल के साथ मजबूत तककी और रक्षा संबंध हैं। वहीं ईरान के साथ ऊर्जा और क्षेत्रीय सहयोग जुड़ा हुआ है। मिडिल ईस्ट क्षेत्र में लगभग 1 करोड़ भारतीय काम कर रहे हैं। उनकी सुरक्षा भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता है। भारत के सामरिक मामलों के प्रमुख विश्लेषक, टिप्पणीकार स. जयशंकर ने अपने समकक्ष ईरान के विदेश मंत्री से बातचीत की और अन्य देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा। उन्होंने साफ कहा कि 'तनाव कम करने का एकमात्र रास्ता संवाद और कूटनीति है।' जयशंकर के अनुसार भारत ने खाड़ी देशों से हजारों नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। संसद में भी इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई है।