नईदिल्ली (13 सितंबर 26)। कांग्रेस ने भारत-चीन संबंधों को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रुख पर रविवार को उनसे चार सवाल पूछे और आरोप लगाया कि वह चीन के सामने 'सुनियोजित आत्मसमर्पण' की नीति अपना रहे हैं। कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सवाल किया कि क्या 19 जून 2020 को चीन को दी गई प्रधानमंत्री की 'कुख्यात क्लीन चिट' से भारत कमजोर नहीं हुआ और उन्होंने 'लद्दाख एवं अब अरुणाचल प्रदेश में चीन को क्षेत्रीय बढ़त बनाने की अनुमति क्यों दी।'
इन आरोपों पर सरकार या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। रमेश की इस टिप्पणी से एक दिन पहले शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से कहा था कि भारत-चीन संबंधों के विकास के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता रहना बेहद आवश्यक है। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में 'लगातार हो रही प्रगति' का स्वागत किया था। विदेश मंत्रालय के अनुसार, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुई बातचीत में दोनों नेताओं ने इस बात को दोहराया कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक एवं दीर्घकालिक नजरिए से देखना चाहिए और मतभेदों को विवादों में नहीं बदलना चाहिए। रमेश ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक बयान में कहा, 'अब जबकि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ आपकी द्विपक्षीय बैठक समाप्त हो चुकी है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से चार ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब देश अब भी जानना चाहता है। क्या 19 जून 2020 को चीन को दी गई आपकी कुख्यात 'क्लीन चिट' ने भारत को कमजोर नहीं किया?' कांग्रेस नेता ने कहा, '15-16 जून 2020 की रात गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ आमने-सामने की लड़ाई में हमारे 20 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था और यह 45 वर्ष में सीमा पर इस तरह जान गंवाने की पहली घटना थी।' रमेश ने कहा, 'इसके सिर्फ चार दिन बाद 19 जून 2020 को आपने सर्वदलीय बैठक में बिना किसी स्पष्ट कारण के कहा था, 'न कोई हमारी सीमा में घुस आया है, न ही कोई घुसा हुआ है।' इस बयान को कभी वापस नहीं लिया गया। क्या इससे बाद की बातचीत में हमारी स्थिति काफी कमजोर नहीं हुई?' उन्होंने यह भी पूछा कि प्रधानमंत्री ने 'लद्दाख और अब अरुणाचल प्रदेश में चीन को क्षेत्रीय बढ़त बनाने की अनुमति क्यों दी।'