रोम (21 मई 26)। प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ रोम में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रोम और काशी को इटर्नल सिटी यानी कभी न खत्म होने वाले शहर कहा। यह तुलना केवल सांस्कृतिक नहीं, बल्कि सभ्यता की निरंतरता का प्रतीक भी है। वाराणसी को दुनिया के सबसे प्राचीन जीवित नगरों में माना जाता है, जहां हजारों वर्षों से धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं लगातार चलती आ रही हैं।
आइये जानते हैं शिव की नगरी वाराणसी का इतिहास- स्कंदपुराण में आया है कि ‘श्म’ का अर्थ है ‘शव’ और ‘शान’ का है सोना (शयन) या पृथ्वी पर पड़ जाना। जब प्रलय आती है तो महान तत्व शवों के समान यहां पड़ जाते हैं, अत: यह स्थान ‘श्मशान’ कहलाता है। जैसे सूर्यदेव एक जगह स्थित होने पर भी सब को दिखाई देते हैं, वैसे ही संपूर्ण काशी में सर्वत्र बाबा विश्वनाथ का ही दर्शन होता है। पुराणों में ऐसा आया है कि काशी के पद-पद पर तीर्थ हैं, एक तिल भी स्थल ऐसा नहीं है, जहां शिव नहीं हों। काशी की महिमा विभिन्न धर्म ग्रंथों में गाई गई है। काशी शब्द का अर्थ है, प्रकाश देने वाली नगरी। जिस स्थान से ज्ञान का प्रकाश चारों ओर फैलता है, उसे काशी कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि काशी-क्षेत्र में देहांत होने पर जीव को मोक्ष की प्राप्ति होती है। विश्वनाथ जी की अति-श्रेष्ठ नगरी काशी पूर्वजन्मों के पुण्यों के प्रताप से ही प्राप्त होती है। यहां शरीर छोड़ने पर प्राणियों को मुक्ति अवश्य मिलती है। काशी बाबा विश्वनाथ की नगरी है। काशी के अधिपति भगवान विश्वनाथ कहते हैं - ‘इदं मम प्रियंक्षेत्रं पंचकोशीपरीमितम्’ यानी पांच कोस तक विस्तृत यह क्षेत्र (काशी) मुझे अत्यंत प्रिय है।