Tuesday, 29 Sep 2026

युद्ध में जीत जीत सैनिकों से ही मिलेगी: राजनाथ सिंह

विशाखापत्तनम (12 जुलाई 26)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि हालांकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई तकनीकें युद्ध के तरीके को बदल रही हैं, फिर भी पारंपरिक सैन्य क्षमताएं बहुत ज़रूरी हैं। उन्होंने ज़ोर दिया कि भविष्य के संघर्षों में AI शामिल हो सकता है, लेकिन जीत आखिरकार राष्ट्रीय संकल्प, प्रशिक्षित सैनिकों और मज़बूत सैन्य ताकत से ही मिलेगी। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना में INS महेंद्रगिरि को शामिल करने के समारोह में रक्षा मंत्री सिंह ने कहा, 'नई तकनीकों ने बेशक युद्ध के तरीके को बदल दिया है, लेकिन उन्होंने पारंपरिक युद्ध क्षमताओं के महत्व को कम नहीं किया है। युद्ध के बुनियादी सिद्धांतों को पूरा करने के लिए मज़बूत पारंपरिक क्षमताएं आज भी उतनी ही ज़रूरी हैं जितनी पहले थीं। भविष्य की लड़ाइयाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लड़ी जा सकती हैं, लेकिन जीत राष्ट्रीय संकल्प, प्रशिक्षित सैनिकों और मज़बूत सैन्य ताकत से ही मिलेगी।'

तकनीकी प्रगति और पारंपरिक ताकत के बीच संतुलन बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, 'नई तकनीक और पारंपरिक प्लेटफॉर्म एक-दूसरे के दुश्मन नहीं बल्कि पूरक हैं; नई तकनीक के बिना पारंपरिक प्लेटफॉर्म अधूरा है और इसके बिना पारंपरिक प्लेटफॉर्म कमज़ोर हो जाता है। इतिहास गवाह है कि जिन देशों ने नई तकनीक के आकर्षण में आकर अपनी पारंपरिक ताकत को नज़रअंदाज़ किया, उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी।' भारत की दीर्घकालिक रक्षा रणनीति पर ज़ोर देते हुए रक्षा मंत्री सिंह ने कहा, 'इसलिए, भारत का नज़रिया बहुत स्पष्ट है: हमें दोनों क्षेत्रों में बेहतर करना होगा और उनके बीच संतुलन बनाए रखना होगा।' उन्होंने कहा, 'हम भविष्य की तकनीकों में निवेश करेंगे और साथ ही अपनी पारंपरिक क्षमताओं को लगातार बेहतर बनाते रहेंगे। INS महेंद्रगिरि इसी संकल्प और प्रतिबद्धता का प्रतीक है।' भारत के हालिया सैन्य अभियानों का ज़िक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि देश ने पारंपरिक और आधुनिक क्षमताओं को प्रभावी ढंग से एक साथ इस्तेमाल करने की अपनी क्षमता पहले ही साबित कर दी है। 

रक्षा मंत्री ने कहा, 'हाल के समय में हमने देखा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में हमारी पारंपरिक और आधुनिक क्षमताएं कैसे मिलकर काम करती हैं। 'ऑपरेशन सिंदूर' इसका एक बड़ा उदाहरण था। उस ऑपरेशन के दौरान, हमारे सशस्त्र बलों ने दिखाया कि भारत न केवल अपनी रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर निर्णायक जवाब देने और दुश्मन को पूरी तरह खत्म करने में भी सक्षम है।'

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