Saturday, 03 Oct 2026

युद्ध से घिरी दुनिया में संवाद ही समाधान का रास्ता: उपराष्ट्रपति

नईदिल्ली (21 मार्च 26)। उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने शनिवार को कहा कि दुनिया युद्ध के खतरे से जूझ रही है और केवल संवाद से ही समाधान निकल सकता है। राधाकृष्णन ने यहां रेशिमबाग स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर परिसर में भारतीय युवा संसद के 29वें राष्ट्रीय सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि अपनी मातृभाषा में बोलना क्षेत्रीय होने का नहीं, बल्कि मौलिक होने का प्रतीक है। इस चार दिवसीय युवा संसद की विषय वस्तु 'भारतीय भाषाएं और विकसित भारत-2047' है। उन्होंने कहा, ''जब पूरी दुनिया युद्ध के खतरे से घिरी है, तब केवल संवाद ही समाधान का रास्ता दिखा सकता है।

युवा संसद हमें सम्मानजनक तरीके से चर्चा करने, विविध दृष्टिकोणों को सुनने और संवाद के माध्यम से समाधान खोजने का महत्व सिखाती है।'उन्होंने कहा, '(युवा संसद की) विषय वस्तु भाषा पर आधारित होना समय की आवश्यकता है। भारत में अनेक भाषाएं हैं। हर व्यक्ति अपनी मां से प्रेम करता है, हर व्यक्ति अपनी मातृभाषा और अपने धर्म से प्रेम करता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि हमें दूसरे व्यक्ति की मां का सम्मान नहीं करना चाहिए। जब हम अपनी मातृभाषाओं में बोलते हैं, तब हम क्षेत्रीय नहीं बल्कि मौलिक होते हैं।' उपराष्ट्रपति ने कहा कि हर भाषा अपनी अलग विरासत समेटे हुए है, लेकिन ये सभी मिलकर सांस्कृतिक समरसता का निर्माण करती हैं जो भारत की पहचान है। उन्होंने कहा, 'भारत माता से बड़ा कोई भगवान नहीं है।' राधाकृष्णन ने कहा कि उन्होंने हाल में संविधान का अद्यतन अनुवादित संस्करण तमिल और गुजराती में जारी किया और इसे इतनी भाषाओं में उपलब्ध कराने की पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, 'संविधान पहली बार डोगरी, संथाली और कई अन्य भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है। भारत की भाषाई विविधता के संरक्षण और संवर्धन के लिए केंद्र सरकार कई प्रयास कर रही है।'

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