अहमदाबाद (29 सितंबर 26)। गुजरात के गांधीनगर में राजनीतिक चंदे की आड़ में चल रहे एक बड़े वित्तीय घोटाले और कर चोरी के रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। अहमदाबाद के आयकर उपायुक्त (यूनिट 2-1) डॉ. राजेंद्र राज द्वारा दर्ज कराई गई एक आधिकारिक शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आपराधिक मामला शुरू कर दिया है। यह पूरी कार्रवाई एक पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल 'भारतीय नेशनल जनता दल' और उसके शीर्ष पदाधिकारियों के खिलाफ की गई है, जो गांधीनगर के सेक्टर 11 से अपना संचालन कर रहा था।
जांच अधिकारी के निष्कर्षों के अनुसार, भारतीय नेशनल जनता दल ने वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2024-25 के बीच 56,000 से अधिक करदाताओं से 1,143 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी राजनीतिक चंदा एकत्र किया। इस गिरोह द्वारा करदाताओं से आरटीजीएस जैसे आधिकारिक बैंकिंग चैनलों के माध्यम से पार्टी के खातों में धन हस्तांतरित करवाया जाता था। इसके बदले में पार्टी जाली (बोगस) चंदा रसीदें जारी करती थी, जिससे करदाताओं को आयकर अधिनियम के वैधानिक प्रावधानों के तहत 100 प्रतिशत कर छूट का दावा करने की सुविधा मिलती थी। आरोपियों ने भारत निर्वाचन आयोग को फॉर्म 24A में फर्जी योगदान रिपोर्ट जमा करके और झूठे लेखा रिकॉर्ड बनाकर कानूनी प्रावधानों में हेरफेर किया। अधिकारियों का अनुमान है कि इस फर्जीवाड़े के कारण राष्ट्रीय खजाने को लगभग 343 करोड़ रुपये का सीधा आयकर नुकसान हुआ है। पुलिस ने धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
जांच में खुलासा हुआ कि पार्टी के खातों में आई राशि को बाद में जे ट्रेडिंग, काजल एंटरप्राइजेज और परमार एसोसिएट्स जैसी फर्जी (डमी) कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इस लेनदेन को सही ठहराने के लिए अनाज, दालों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीद के फर्जी इनवॉइस (बिल) तैयार किए जाते थे। इन शेल कंपनियों के खातों में पैसा पहुंचते ही उसे पूरी तरह से नकद में निकाल लिया जाता था। इसके बाद मास्टरमाइंड 2 से 10 प्रतिशत का तय कमीशन काटकर बाकी रकम को अंगड़िया और हवाला नेटवर्क के जरिए असली करदाताओं तक वापस पहुंचा देते थे। शिकायत में पार्टी अध्यक्ष सुरेंद्रकुमार विट्ठलभाई गजेरा को इस पूरे सिंडिकेट का मुख्य सरगना और मास्टरमाइंड बताया गया है, जो इस पूरे ऑपरेशन और डमी फर्मों के नेटवर्क की निगरानी करता था। पार्टी के महासचिव विपुल सोलंकी पर मैसेजिंग ऐप्स के जरिए फर्जी रसीदें जारी करने का आरोप है। जांच में यह भी सामने आया कि यह दल कोई वास्तविक राजनीतिक गतिविधि नहीं चलाता था और केवल एक दिखावटी सोशल मीडिया प्रेजेंस बनाए रखता था। इसके अलावा, पार्टी के कोषाध्यक्ष रौनकसिंह चावड़ा के घर से डिजिटल चैट और लेन-देन की रसीदें जब्त की गई हैं। वहीं, चार्टर्ड अकाउंटेंट आदिल सैयद पर बिना किसी जांच या दफ्तर आए फर्जी ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने और साइन करने का आरोप है।