Monday, 28 Sep 2026

राज्यपाल से मिले भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी

भोपाल (20 अप्रैल 26)। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि भारतीय वन सेवा, महज प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि मानवता, प्रकृति, वन्य जीव, सांस्कृतिक धरोहर और भावी पीढ़ियों के प्रति भी एक उत्तरदायित्व है। आप सभी सौभाग्यशाली है, जिन्हें जीवन भर प्रकृति की गोद में रहकर उसके संरक्षण और संवर्धन का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षु अधिकारी, वन कानूनों और जनजातीय कल्याण के प्रावधानों का गहनता से अध्ययन करें, उन्हें समझे और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप लागू करें। प्रशिक्षण की सीख को प्रकृति, वन, वन्य जीव और स्थानीय जन जीवन की बेहतरी में उपयोग करें।  राज्यपाल सोमवार को भारतीय वन सेवा के 2024-26 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों के सौजन्य भेंट कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। लोकभवन के बैंक्वेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्राकृतिक असंतुलन, पर्यावरणीय चुनौतियों आदि के कारण वन एवं वन्य जीवन के संकट का समाधान अत्यंत जरूरी है। वन अधिकारी के रूप में पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन आपका प्राथमिक दायित्व है। इसके लिए आपकी सोच, संकल्प और सेवा का भाव सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के साथ हमेशा आत्मीय, सरल और सहज व्यवहार करें। अपने अच्छे व्यवहार और सहयोग से उनका विश्वास जीते। वनों की अवैधानिक कटाई, शिकार आदि समस्याओं के समाधान में स्थानीय लोगों का सहयोग प्राप्त करें। पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध राज्य है। यहाँ की वन भूमि प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर होने के साथ हमारी गौरवशाली सभ्यता, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी संजोए हुए हैं। प्रदेश में विस्तृत और विश्व प्रसिद्ध वन, अनेक राष्ट्रीय उद्यान, अभ्यारण्य है। मध्यप्रदेश बाघ, चीतल, तेंदुआ, गिद्ध, घड़ियाल और चीता स्टेट के रूप में प्रसिद्ध है। राज्य में गैंडा, हाथी आदि वन्य जीवों के पुनर्वास के अभूतपूर्व प्रयास भी चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग के वैज्ञानिक प्रबंधन प्रयासों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश आज वन-वन्य जीव प्रबंधन में अग्रणी राज्य है।

Tags:

Follow us

This question is not available..!