इंदौर (28 नवंबर 25)। इंदौर हाई कोर्ट की डबल बैंच ने गुरूवार को राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा एकत्रित किए जाने को लेकर लगी एक जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इसमें याचिकाकर्ता स्वयं पूर्व सीएम दिग्विजयसिंह कोर्ट में पहुंचे और अपना पक्ष रखा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 2018 में पूनावाला केस में दिए गए फैसले के बिंदुओं को कोर्ट के समक्ष रखते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन नहीं हो रहा है। इस दौरान कोर्ट कार्रवाई की लाइव स्ट्रीमिंग को लेकर आपत्ति आने पर उसे बंद करवा दिया। केस की सुनवाई लगभग आधा घंटा तक चली जिसमें पूर्व सीएम सिंह ने लगभग 20 मिनट तक अलगझ्रअलग तर्क व साक्ष्य के साथ अपना पक्ष रखा। अब कोर्ट ने इसमें सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया है।
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने इंदौर हाई कोर्ट की डबल बैंच जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी के समक्ष अपना पक्ष रखने पहुंचे। याचिकाकर्ता की तरफ से एडवोकेट रविंद्र छाबड़ा ने जनहित याचिका दायर की है। गुरूवार को हुई सुनवाई के दौरान एडवोकेट अमन अरोरा ने जिरह की। पूर्व सीएम सिंह ने कहा कि जब कोई रैली निकलती है या फिर कोई दंगा होता है तो फिर पुलिस को क्या काम करना चाहिए। इसके संबंध में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से स्पष्ट दिशाझ्रनिर्देश हैं। जिसमें कहा गया है कि हर जिले में नोडल आॅफिसर होने चाहिए, जिनकी सूची पहले से जारी की जानी चाहिए। किसी प्रकार का विवाद होता है तो फिर विक्टिम को मुआवजा कैसे मिलना चाहिए। इसको लेकर कुल 15 के करीब दिशाझ्रनिर्देश जारी किए गए हैं।