लखनऊ (14 मई 24)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को अपने एक अहम बयान में कहा कि राम राज्य का आशय किसी 'थियोक्रेटिक स्टेट' (किसी एक धर्म आधारित शासन व्यवस्था वाला देश) से नहीं है। राम राज्य का मतलब जन सामान्य के अंदर एक जिम्मेदारी की भावना या कर्तव्य बोध का संचार करने से है। लखनऊ से सांसद और इसी सीट से लगातार तीसरी बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार राजनाथ सिंह ने यहां आयोजित प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन को संबोधित किया।
इस दौरान उन्होंने राम मंदिर का जिक्र करते हुए कहा, 'हम लोगों ने कहा था कि राम हमारी आस्था के केंद्र हैं। हमको बहुमत मिलेगा तो अयोध्या की धरती पर राम का भव्य मंदिर बनेगा। आपने देखा कि वह काम भी हो गया। मुझे तो अब लगने लगा है कि भगवान राम अपनी झोपड़ी से निकल कर अपने महल में प्रवेश कर चुके हैं, इसलिये भारत में राम राज्य का आगाज होकर रहेगा। मुझे इसका पक्का विश्वास है।' उन्होंने कहा, 'यदि मैं राम राज्य की बात करता हूं तो इसका मतलब किसी ‘थियोक्रेटिक स्टेट' से नहीं है। राम राज्य का मतलब यह होता है कि जन सामान्य के अंदर एक जिम्मेदारी की भावना उत्पन्न हो, कर्तव्य का बोध उत्पन्न हो। जब लोगों के बीच कर्तव्य बोध उत्पन्न नहीं होगा और केवल अधिकार बोध ही उत्पन्न होगा, तब राम राज्य नहीं आ सकता।'
सिंह ने रामायण का जिक्र करते हुए कहा कि कैकयी के अंदर कर्तव्य बोध नहीं था, बल्कि एक अधिकार बोध था, जिसके कारण सारा संकट पैदा हुआ और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम को वनवास के लिए जाना पड़ा था।
रक्षा मंत्री ने कहा कि राजनीति का अर्थ एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था से है जो समाज को सन्मार्ग की ओर ले जाए। लेकिन विडंबना यह है कि आजाद भारत में राजनीति शब्द अपना अर्थ और भाव खो चुका है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान को ऐसे राजनीतिज्ञों की आवश्यकता है जो ‘राजनीति' शब्द के खोए हुए अर्थ एवं भाव को पुनः भारत की राजनीति में स्थापित कर सकें।