Thursday, 01 Oct 2026

राष्ट्रपति के हाथों इंदौर राष्ट्रीय जल पुरस्कार से सम्मानित

नईदिल्ली (22 अक्टूबर 24)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा '5वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार' से पश्चिम जोन के अंतर्गत इंदौर को सर्वश्रेष्ठ जिले के तौर पर पुरस्कृत करने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि के लिए समस्त प्रदेशवासियों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा है कि 'मध्यप्रदेश पानी की एक-एक बूंद के उचित उपयोग एवं संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है और 'जल-संरक्षण' की दिशा में निरंतर अपनी भूमिका का निर्वाह कर रहा है। आने वाली पीढ़ी के लिए अपनी नैतिक जिम्मेदारी को भली-भाँति समझते हुए हमने प्रदेश में जल-संरचनाओं का जाल बिछाया है, पुरानी जल-संरचनाओं का नवीनीकरण किया है और सिंचाई क्षमता को बढ़ाने का लगातार प्रयत्न किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि इंदौर जिले को जल-संचयन और जल-संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान के लिए पश्चिम क्षेत्र  के सर्वश्रेष्ठ जिले का राष्ट्रीय जल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में हुए 5वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार-2023 समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने यह पुरस्कार प्रदान किया। कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और राज्यमंत्री वी. सोमन्ना भी उपस्थित थे। पुरस्कार इंदौर के कलेक्टर आशीष सिंह, नगर निगम आयुक्त शिवम वर्मा तथा जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन ने ग्रहण किया। इंदौर जिले में जल-संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई हैं। जिले में अजनार, बालम, चोरल, कराम, मोरल और पातालपानी नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में विभिन्न कार्य किए गए हैं, जिनमें 366 पौध-रोपण कार्य, 216 जल-संचयन कार्य, 60 रिचार्ज संरचनाएं, 90 वाटरशेड उपचार कार्य और 814 जल और मिट्टी संरक्षण कार्य शामिल हैं। इसके अलावा  बालम नदी के जलग्रह-क्षेत्र में 5 अमृत सरोवर, 4 फार्म पॉन्ड, 5 चेक डैम और 30 गेबियन जाल संरचनाएं बनाई गई हैं।

जल-संचयन के प्रयासों के अंतर्गत नाला ट्रेंचिंग (गहरीकरण) के लगभग 420 कार्य किए गए हैं, जिससे जल स्तर में वृद्धि हुई है। पुष्कर धरोहर समृद्धि अभियान के तहत 462 पुरानी संरचनाएं जैसे- तालाब, चेक डैम और स्टॉप डैम का जीर्णोद्धार किया गया है, जिससे जल-भंडारण क्षमता में 16 लाख घन मीटर की वृद्धि हुई है और 1500 हेक्टेयर कृषि भूमि के लिए अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध हुई है। जिले में वृहद स्तर पर जल-संचयन संरचनाएं भी निर्मित की गयी हैं, जिसमे 420 फार्म पॉन्ड, 180 पेरकोलेशन टैंक, 100 निस्तारी टैंक और 190 चेक डैम शामिल हैं। इससे जिले में जल-भंडारण क्षमता में 30 लाख घन मीटर की वृद्धि हुई है। लगभग 25 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों के तहत लाया गया है, जिससे जिले के लगभग 16 हजार किसान लाभान्वित हुए हैं। जिले में एक लाख घरों की छतों पर नागरिकों द्वारा अपने खर्च पर ही वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित की गई हैं और 10 स्थानों पर पीज़ोमीटर लगाए गए हैं, जिससे जल स्तर का मूल्यांकन किया जा सके। 


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