Tuesday, 29 Sep 2026

रूसी मिसाइलों और 496 ड्रोन से दहला यूक्रेन

कीव (03 जुलाई 26)। रूस ने गुरुवार रात यूक्रेन की राजधानी कीव पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया। इस हमले में कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई, जबकि 90 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई घंटों तक राजधानी में धमाकों की आवाजें गूंजती रहीं और बड़ी संख्या में लोगों ने जान बचाने के लिए मेट्रो स्टेशनों में शरण ली। यूक्रेन के अधिकारियों के अनुसार, हमले में आवासीय इमारतों और नागरिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। शहर के करीब 30 स्थान प्रभावित हुए और लगभग 20 रिहायशी इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। एक नौ मंजिला इमारत में कई लोग मलबे में फंस गए, जिन्हें निकालने के लिए बचाव अभियान चलाया गया। वहीं, एक 16 मंजिला इमारत की छत पर लगी आग बुझाने के लिए सैकड़ों दमकलकर्मियों और विशेष वाहनों को तैनात किया गया।

रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह हमला यूक्रेन द्वारा हाल के दिनों में रूस के तेल और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर किए गए ड्रोन हमलों के जवाब में किया गया। मंत्रालय का दावा है कि उसने लंबी दूरी की मिसाइलों और ड्रोन से यूक्रेन के रक्षा उद्योग, ईंधन एवं ऊर्जा परिसरों तथा सैन्य हवाई अड्डों को निशाना बनाया। यूक्रेन की वायु सेना के मुताबिक, रूस ने इस हमले में 74 मिसाइलें, जिनमें 24 बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल थीं, दागीं। इसके अलावा 496 ड्रोन भी छोड़े गए, जिससे यह हाल के सबसे बड़े हमलों में से एक माना जा रहा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने हमले के बाद सहयोगी देशों से वायु रक्षा प्रणाली और मिसाइलों की आपूर्ति तेज करने की अपील की। विदेश मंत्री Andrii Sybiha ने कहा कि रूस की कार्रवाई को किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता और यूक्रेन संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत आत्मरक्षा का अधिकार इस्तेमाल कर रहा है।

इस बीच, यूक्रेन ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। यूक्रेनी जनरल स्टाफ के अनुसार, उसकी सेना ने रूस के Nizhny Novgorod Oblast में स्थित एक प्रमुख तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया, जिससे वहां आग लग गई। साथ ही, रूस के कब्जे वाले Luhansk Oblast में Siverskyi Donets River पर बने एक रेलवे पुल को भी निशाना बनाया गया, जिसका इस्तेमाल रूसी सेना सैनिकों और सैन्य सामग्री की आवाजाही के लिए करती थी। रूस और यूक्रेन के बीच हाल के सप्ताहों में हमलों की तीव्रता लगातार बढ़ी है। दोनों पक्ष एक-दूसरे के सैन्य और ऊर्जा ढांचे को निशाना बना रहे हैं, जिससे युद्ध और अधिक व्यापक तथा विनाशकारी होता जा रहा है।


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